
समस्तीपुर/दरभंगा। उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत गावपुर पंचायत के योगी चौक पर, बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक निर्वाचन के प्रत्याशी आदित्य झा का स्थानीय स्नातक मतदाताओं ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान एक निजि रेस्टोरेंट में पत्रकार सह मतदाता मिलन समारोह का आयोजन भी किया गया। इस दौरान मिथिला परंपरा के अनुसार सभी पत्रकारों व मतदाताओं का मिथिला परंपरा के अनुसार पाग, माला व गमछा देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी, आदित्य कुमार झा ने प्रेस वार्ता कर अपने चुनावी एजेंडे और प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, और बिहार से प्रतिभा पलायन रोकने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया। उन्होंने मतदाताओं से जाति, धर्म और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता, व्यवहार, सामाजिक योगदान और विजन के आधार पर मतदान करने की अपील की।
प्रेस वार्ता में आदित्य कुमार झा ने दावा किया कि, पिछले सात-आठ महीनों के दौरान विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों और गांवों के दौरे में उन्हें निवर्तमान प्रतिनिधि के प्रति लोगों में असंतोष देखने को मिला है। उनके अनुसार, शिक्षा और शिक्षित वर्ग से जुड़े कई मुद्दों का अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर उठाए सवाल
शिक्षा के बढ़ते खर्च पर चिंता जताते हुए श्री झा ने निजी स्कूलों में हर साल पाठ्यक्रम और किताबें बदलने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे शिक्षा के व्यवसायीकरण से जोड़ते हुए कहा कि, इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और अभिभावकों को बेवजह अतिरिक्त खर्च का सामना नहीं करना पड़े।
उन्होंने उच्च अंक प्राप्त करने के बावजूद युवाओं को उचित रोजगार नहीं मिलने की समस्या भी उठाई। श्री झा ने इस दौरान यह भी कहा कि, डिग्री हासिल करने के बाद भी कई युवाओं को कम वेतन वाली नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ता है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।
शिक्षकों के हित में चार प्रमुख मांगें
आदित्य कुमार झा ने शिक्षकों की समस्याओं को अपने चुनावी एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए चार प्रमुख मुद्दों पर काम करने की बात कही। इनमें पुरानी पेंशन योजना लागू कराने, सातवें वेतन आयोग से जुड़े लाभ सुनिश्चित कराने, शिक्षकों के दूर-दराज के क्षेत्रों में तबादले की समस्या का समाधान करने, तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने की प्रथा समाप्त कराने की मांग शामिल है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बेहतर कार्य परिस्थितियां और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
अपनी संघर्ष यात्रा का किया जिक्र
अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों और संघर्ष का उल्लेख करते हुए आदित्य झा ने बताया कि, वह चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), कॉस्ट अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने बिना आरक्षण, पैरवी या किसी प्रकार के जुगाड़ के यह पेशेवर योग्यताएं हासिल की हैं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि, दसवीं कक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने इंटरमीडिएट में बेहतर प्रदर्शन कर अपनी शैक्षणिक यात्रा को नई दिशा दी। उनके अनुसार, यह अनुभव युवाओं को कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
बिहार में ही प्रतिभाओं को मिले अवसर
बिहार से युवाओं और प्रतिभाशाली लोगों के दूसरे राज्यों में जाने पर चिंता जताते हुए श्री झा ने कहा कि, राज्य के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और बेहतर अवसर पैदा करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिहार की प्रतिभाओं को अपने ही राज्य में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वह अपनी योग्यता का उपयोग प्रदेश और समाज के विकास में कर सकें। उन्होंने युवाओं की समस्याओं को स्वीकार करते हुए कहा कि, रोजगार के अवसरों की कमी एक बड़ी चुनौती है और इसके समाधान के लिए ठोस पहल की आवश्यकता है।
प्रथम वरीयता का वोट देने की अपील
प्रेस वार्ता के अंत में आदित्य कुमार झा ने स्नातक मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधान परिषद का स्नातक निर्वाचन क्षेत्र ऐसा मंच है, जहां मतदाता उम्मीदवार की व्यक्तिगत योग्यता, सोच और कार्ययोजना को महत्व दे सकते हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षित वर्ग के मुद्दों को प्रमुखता देने का आग्रह किया।
प्रत्याशी ने आगामी 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव का उल्लेख करते हुए अपना क्रमांक 15 बताया और मतदाताओं से प्रथम वरीयता का मत देकर उन्हें विधान परिषद में भेजने की अपील की।






