समस्तीपुर। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी अन्य शैक्षणिक सत्र की तरह वर्ष 2026 में भी अपने सीमा चरम पर पहुंच गई है। जिले के कई नामी निजी विद्यालयों के द्वारा, छात्रों और उनके अभिभावकों से किताब, ड्रेस, टाई, बेल्ट, डायरी, टेस्ट, प्रमोशन और विभिन्न प्रकार के मदों का आविष्कार कर उससे संबंधित शुल्क के नाम पर भारी भरकम राशि वसूली जा रही है।

निजी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के अभिभावकों का आरोप है कि, निजि विद्यालय के प्रबंधन द्वारा उन्हें विशेष दुकानों से ही किताब और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे खर्च और भी बढ़ जाता है। शहर के कुछ ऐसे भी निजि विद्यालय हैं, जो अपने विद्यालय प्रबंधन के द्वारा ही अध्ययनरत बच्चों को किताबें, कॉपी व ड्रेस लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, हर साल अलग-अलग बहानों से फीस में बढ़ोतरी भी कर दी जाती है, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
कई अभिभावकों ने अपनी पहचान उजागर नही करने के शर्त पर यह भी बताया कि, अगर वह विद्यालय प्रबंधन के इन शर्तों का विरोध करते हैं तो, उनके बच्चों पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया जाता है। जिसके कारण वहलोग ही नहीं! अधिकांश बच्चों के अभिभावक चाहकर भी इसका खुलकर विरोध नहीं कर पाते।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर इस तरह की लूट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, समस्तीपुर जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कुछ कदम उठाती है।







