जिला-वासियों को कब मिलेगा इस काले नाग से छुटकारा! इस काले नाग के साथ जिला में आए अन्य विष-रहित काले नाग व नागिन का बदला जा चुका है ठिकाना

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समस्तीपुर। जिले में इन दिनों एक ऐसे कथित “काला नाग” की चर्चा हर चौक-चौराहे पर हो रही है, जिसने वर्षों से जिले में अपना ऐसा जाल फैला रखा है कि लोग खुलकर नाम लेने से भी कतराने लगे हैं। शहर से लेकर गांव तक, जमीन कारोबार से जुड़े लोग धीरे-धीरे इस रहस्यमयी “भूमाफिया बाबा” की कहानियां सुनाते नजर आते हैं। कहा जाता है कि यह शख्स वर्षों से रामधुनि जमाकर ऐसे बैठा है, मानो किसी पुराने बिल में कुंडली मारकर बैठा काला कोबरा हो, जिसका फन आज भी उतना ही जहरीला है जितना पहले था।

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि इससे कम जहरीले कई “नाग” पिछले कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल चुके हैं। कुछ ने इलाके से दूरी बना ली, तो कुछ ने दूसरे जिलों का रुख कर लिया। लेकिन यह कथित “काला नाग” आज भी समस्तीपुर में पूरी सक्रियता के साथ मौजूद बताया जाता है। इसने अब तक दर्जनों लोगों को अपने जाल में फंसाकर डसा है। कोई जमीन विवाद में बर्बाद हुआ, तो कोई कागजी खेल में अपनी पुश्तैनी संपत्ति गंवा बैठा। कई परिवार आज भी न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि इस “विषधारी” के कारनामों की भनक जंगल के राजा “शेर” तक भी पहुंच चुकी थी। कहा जाता है कि शेर ने इसकी गतिविधियों पर नजर डालनी शुरू कर दी थी और जल्द ही कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी भी थी। लेकिन अफसोस, इससे पहले कि कोई कार्रवाई होती, इस “काले नाग” ने अपने आकाओं के साथ मिलकर ऐसा पलटवार किया कि खुद “शेर” ही कमजोर पड़ गया। इसके बाद पूरे जंगल का माहौल ही बदल गया।

चर्चा तो यहां तक है कि इस कथित नाग के प्रभाव से जिले में छोटे-बड़े कई नए “विषधारी सांपों” की संख्या तेजी से बढ़ गई। जमीन कारोबार के नाम पर नए चेहरे सामने आने लगे। हर कोई अपने-अपने तरीके से फन फैलाने में जुट गया। बताया जाता है कि खुश होकर छोटे-छोटे विषधारी जीवों ने मिलकर इस “काला नाग” को रहने के लिए लाखों का शानदार “बिल” और घूमने के लिए “पुष्पक विमान” तक भेंट कर दिया। इसके बाद से इसका रुतबा और भी बढ़ गया।

हालांकि यह पूरी कहानी प्रतीकात्मक रूप में कही जा रही है, लेकिन जिले में इस काला नाग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वह कौन है, जिसका प्रभाव वर्षों बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा? कौन है वह शख्स, जिसके खिलाफ फुसफुसाहट तो बहुत है, लेकिन खुलकर बोलने की हिम्मत कम लोग जुटा पा रहे हैं?

फिलहाल, समस्तीपुर के गलियारों में यह “काला नाग” चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। लोग इंतजार में हैं कि आखिर कब इस रहस्यमयी कहानी का सच सामने आएगा और कब जंगल में फिर से शांति स्थापित होगी।

नोट: यह खबर पूरी तरह प्रतीकात्मक शैली में लिखी गई है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की प्रत्यक्ष पहचान करना नहीं है।

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