समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड क्षेत्र के गावपुर योगी चौक स्थित हिमांशु मेडिकल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी और सूत्रों के दावों के अनुसार, एक ही अनुज्ञप्ति (ड्रग लाइसेंस) के आधार पर हिमांशु मेडिकल नाम से दो अलग-अलग मेडिकल दुकानों का संचालन किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा संबंधित नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
उक्त संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों दुकानें एक ही क्षेत्र में संचालित हो रही हैं, और दोनों पर हिमांशु मेडिकल का नाम अंकित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि, वर्षों से यह व्यवस्था चल रही है, लेकिन जिला स्वास्थ्य समिति, औषधि निरीक्षक एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी है या फिर मामले को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। मेडिकल विभाग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मेडिकल स्टोर का संचालन वैध ड्रग लाइसेंस के आधार पर किया जाता है, और एक लाइसेंस पर निर्धारित नियमों के तहत ही दवा बिक्री की अनुमति होती है। यदि एक ही लाइसेंस पर दो अलग-अलग दुकानों का संचालन किया जा रहा है तो, यह संबंधित संचालक के विरुद्ध आर्थिक जुर्माना, लाइसेंस निलंबन, लाइसेंस रद्द करने तथा अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
नशीली दवाओं की बिक्री के भी आरोप
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन दोनों मेडिकल दुकानों की आड़ में लंबे समय से प्रतिबंधित एवं नशीली दवाओं की खुलेआम बिक्री की जाती रही है। आरोप है कि बिना चिकित्सकीय पर्ची के कुछ ऐसी दवाएं भी बेची जाती हैं, जिनकी बिक्री केवल अधिकृत प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही की जा सकती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने भी इस पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वीडियो में कथित रूप से मेडिकल दुकान पर प्रतिबंधित कफ सिरप और नशीली कैप्सूल की बिक्री होते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
विभागीय चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि एक ही लाइसेंस पर दो मेडिकल दुकानें संचालित हो रही हैं, तो औषधि नियंत्रण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है ? स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया यदि सही ढंग से होती, तो इस प्रकार के मामलों का खुलासा पहले ही हो जाता। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि संबंधित लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड तथा दुकानों के संचालन संबंधी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं औषधि नियंत्रण विभाग पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच कर सच्चाई को सामने लाते हैं या नहीं।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित हैं। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद ही संभव होगी।)







