
समस्तीपुर। बिहार में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार के सवाल को लेकर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) की ओर से आगामी 20 अगस्त को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा परिसर में छात्र-युवा संसद का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारी को लेकर सोमवार 10 अगस्त को समस्तीपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को आरवाईए जिला सचिव रौशन कुमार, आइसा जिला सचिव सुनील कुमार, आइसा जिला अध्यक्ष लोकेश राज, आइसा जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी, आरवाईए नगर सचिव कुंदन यादव और आरवाईए जिला कमेटी सदस्य मुकेश कुमार गुप्ता ने संबोधित किया।
आरवाईए जिला सचिव रौशन कुमार ने कहा कि, बिहार में शिक्षा और रोजगार के सवाल पर आइसा एवं आरवाईए का छात्र-युवा संसद अभियान चल रहा है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शिक्षा की स्थिति के साथ-साथ रोजगार के सवालों को लेकर चल रहे आंदोलनों को आगे बढ़ाया जाएगा।
आइसा जिला सचिव सुनील कुमार ने कहा कि बेरोजगार छात्र-युवाओं को कथित तौर पर “कॉकरोच” कहे जाने के अपमान के खिलाफ उठी आवाज अब देशभर में परीक्षा व्यवस्था की कथित धांधली, पेपर लीक, एनटीए की कार्यप्रणाली और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में छात्र-युवाओं ने आंदोलन किया और बिहार के छात्र-युवा भी इसमें मजबूती से शामिल हुए।
आइसा जिला अध्यक्ष लोकेश राज और आरवाईए नगर सचिव कुंदन कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि पेपर लीक और भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण, फीस वृद्धि, सरकारी विद्यालयों की बदहाली, 7.5 सीजीपीए बैरियर, महाविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त किए जाने तथा सम्मानजनक रोजगार के सवाल से जोड़ते हुए बिहार के हर विश्वविद्यालय और मध्य विद्यालय तक ले जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में बिहार के सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर “छात्र-युवा संसद” का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बिहार के छात्र-युवाओं से 20 अगस्त को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा परिसर में आयोजित छात्र-युवा संसद में बड़ी संख्या में शामिल होकर शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के सवाल पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
संगठनों ने कहा कि छात्र-युवा संसद के माध्यम से शिक्षा बचाने और भविष्य बचाने की लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प लिया जाएगा।







