???? बिग ब्रेकिंग: सच को झूठ व झूठ को सच साबित करने में सबसे आगे हैं उजियारपुर थाना के पुलिस पदाधिकारी, मरन्नासन्न स्थिति में रहने के बाद भी पिड़ित से मांगे पैसे, नही दिया तो जमानतीय धारा में दर्ज कर दी प्राथमिकी, इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा पिड़ित

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अरविन्द कुमार/समस्तीपुर/उजियारपुर: [ बिहार की आवाज  ] उजियारपुर थाना क्षेत्र के रायपुर गांव निवासी आनंद कुमार चौधरी ने, उजियारपुर थाना के थानाध्यक्ष मुकेश कुमार व अपर थानाध्यक्ष विशद विश्वास पर गंभीर आरोप लगाते हुए, वरीय पदाधिकारी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है। पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारी को आवेदन देते हुए, पीड़ित युवक आनंद कुमार चौधरी का बताना है कि, 26 मार्च की दोपहर बाद करीब 3 बजे, उनके पड़ोसी शिवम कुमार चौधरी व उसके कुछ साथियों ने, धारदार हथियार से उनके उपर हमला कर व मारपीट कर अधमरा कर दिया था।

जिसके बाद उनके परिजनों ने स्थानीय लोगों की मदद से, उन्हें ईलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उजियारपुर में भर्ती कराया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए, सदर अस्पताल समस्तीपुर रेफर कर दिया गया। जहां सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने भी उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हाथ खड़े कर दिए थे, तथा तुरंत डीएमसीएच दरभंगा रेफर कर दिया था। हालांकि उनके परिजनों ने दरभंगा नही ले जाकर ईलाज के लिए उन्हें बेगूसराय के एक निजि क्लिनिक में भर्ती कराया। जहां लगातार उन्हें दस दिनों तक आईसीयू में रखा गया गया। इस दौरान सिर में काफी गहरा चोट होने के कारण उनके सिर में 10-12 टांके भी लगाए गए थे। गंभीर स्थिति में ही वह अपने परिजनों के साथ जिंदगी व मौत से जूझते हुए भी चार पहिया वाहन में बैठकर थाना पहुंचकर उन्होंने थानाध्यक्ष को आवेदन भी उपलब्ध करा दिया, तथा जख्म भी दिखा दिया। बाबजूद थानाध्यक्ष ने लापरवाही दिखाते हुए उक्त मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत प्राथमिकी दर्ज नही किया, जिसके कारण सभी आरोपित बदमाश जमानत पर रिहा हो गए तथा, उन्हें केस नही उठाने पर जान से मारने की धमकी देने लगे हैं। हालांकि सुत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, थानाध्यक्ष उजियारपुर मुकेश कुमार के द्वारा आरोपित पक्ष के लोगों से मोटी रकम की वसुली किए जाने के कारण धारा 307 नही लगाया है। थानाध्यक्ष व पिड़ित युवक के अनुसंधानकर्ता विशद विश्वास के उपर लगाए गए आरोपों से संबंधित प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए जब एसडीपीओ दलसिंहसराय विवेक कुमार शर्मा के सरकारी मोबाइल नंबर पर संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गयी तो, उनका मोबाइल नंबर आउट ऑफ नेटवर्क कवरेज एरिया रहने के कारण उनका पक्ष नही जाना जा सका। हालांकि इस मामले में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि, पिड़ित युवक के द्वारा वरीय पदाधिकारी को शिकायती आवेदन पत्र दिए जाने के बाद उक्त मामले में अनुसंधानकर्ता के द्वारा, भारतीय दंड सहिता की सुसंगत धाराओं को चार्जशीट में उपयोग किया जाता है या नही ? अथवा पिड़ित युवक के द्वारा पुलिस पदाधिकारी को 50 हजार रूपए बतौर रिश्वत नही देने के कारण बिना उचित धारा का उपयोग किए ही माननीय न्यायालय को चार्जशीट भेज दिया जाता है ? या वरीय पदाधिकारी के द्वारा रिश्वत की मांग करने वाले उजियारपुर थाना के पुलिस पदाधिकारी पर कार्रवाई की जाती है या नही। यह तो आने वाला समय ही बताएगा। वहीं इस संबंध में पिड़ित युवक के मामला के अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी विशद विश्वास का बताना है कि, पिड़ित युवक आनंद चौधरी के द्वारा उनके उपर लगाए गए सभी आरोप झूठा व बेबुनियाद है। पिड़ित व्यक्ति से चार्जशीट माननीय न्यायालय को भेजने अथवा धारा 307 का प्रयोग करने के नाम पर कोई राशि की मांग नही की गयी है। हालांकि इस केस के अनुसंधानकर्ता विशद विश्वास व एक स्थानीय पुलिस मित्र का ऑडियो रिकॉर्डिंग भी न्यूज पोर्टल के कार्यालय में सुरक्षित है।

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