
अरविन्द कुमार/शिव उदय सिंह:[दलसिंहसराय] जिले के दलसिंहसराय अनुमंडल मुख्यालय स्थित अनुमंडलीय अस्पताल के सामने संचालित, बाबा हॉस्पिटल में एक नाबालिक किशोर की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद, मृत बच्चों के परिजनों ने जमकर हंगामा किया।

जिससे गुस्साए बाबा हॉस्पिटल के कर्मियों ने, मृत किशोर के परिजनों की पिटाई भी कर दिया। जिसके बाद पीड़ित व्यक्ति ने इसकी सूचना दलसिंहसराय थाने की पुलिस को दिया। सूचना मिलने के बाद दलसिंहसराय थाने की पुलिस मौके पर पहुंच, मामले की छानबीन में जुट गई। मृत नाबालिक किशोर की पहचान विद्यापतिनगर थाना क्षेत्र के गढ़सिसई वार्ड 5 निवासी, 12 वर्षिय नीतिश कुमार के रूप में की गई है।

घटना रविवार 21 जुलाई की दोपहर करीब 3 बजे की बतायी जा रही है। घटना के संबंध में मृत किशोर के परिजनों का बताना है कि, उनके बच्चे को किसी सांप ने काट लिया था। जिसका इलाज कराने वह अनुमंडलीय अस्पताल दलसिंहसराय पहुंचे थे। जहां अनुमंडलीय अस्पताल के ठीक सामने संचालित बाबा हॉस्पिटल के एक डॉक्टर जो चंदन टीका लगाए हुए था, ने उन्हें कहा कि वह उनके बच्चे को ठीक कर देगा, तथा उनके बच्चे को लेकर वह अपने अस्पताल में चला गया।

जहां उनसे 24 घंटे के अंदर करीब चार लाख रुपए जमा करवा लिए गए, तथा आज बता रहा है कि, उनके बच्चे की मौत हो गई है। जिस समय बच्चे को बाबा अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा था, उस समय चंदन टीका लगाए हुए डॉक्टर ने बताया था कि, पैसे का चिंता मत कीजिए। वह उनके बच्चे को ठीक कर देगा। जिसके कारण उन्होंने जितना भी पैसा डॉक्टर ने कहा वह देते चले गए। उसके बाद भी डॉक्टर ने गलत ढंग से ईलाज करके उनके बच्चे की जान ले ली।

बच्चे की मौत के बाद जब वह शव लेने आए हैं तो, बाबा हॉस्पिटल के कर्मी ने एक लंबी चौड़ी लिस्ट बनाकर एक लाख रूपए की और भी मांग कर रहे हैं। वही इस संबंध में जानकारी के लिए जब बाबा अस्पताल के डॉक्टर से बातचीत कई गई तो, उन्होंने बताया कि जिस बच्चे की मौत हुई है, उसका ब्रेन ऑलरेडी पहले से ही डेट था, और वह कोमा में था। फिर भी उन्होंने काफी कोशिश किया कि उक्त बच्चे को कोमा से बाहर निकाला जाए, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया।

जिसके बाद उन्होंने उक्त किशोर के परिजनों से कहा कि, उक्त बच्चे को इलाज के लिए पटना या दरभंगा ले जाएं, लेकिन मृत किशोर के परिजन ऐसा नही किए, और उनके हॉस्पिटल पर हंगामा करने लगे। वहीं मौके पर पहुंचे दलसिंहसराय थाना के पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि, उन्हें बाबा हॉस्पिटल पर हंगामे की सूचना मिली थी। जिसके बाद वह यहां पहुंचे हैं।
मामले की छानबीन में जुटे हुए हैं। आपको बता दें कि दलसिंहसराय अनुमंडल मुख्यालय में करीब 70 से 75 ऐसे नर्सिंग होम और ट्रॉमा सेंटर है, जो फर्जी ढंग से संचालित किया जा रहा है। उक्त सभी अस्पताल के संचालकों ने, अनुमंडलीय अस्पताल के आसपास तथा अस्पताल के अंदर तक, अपने दलाल को फैला रखा है, तथा ग्रामीण स्तर पर भी उक्त फर्जी अस्पताल संचालक अपने दलाल को सक्रिय करके रखते हैं।
जिसके लिए उन दलालों को भी एक मरीज के बदले अच्छी खासी रकम दी जाती है। हालांकि उन अस्पताल कर्मियों के पास, किसी भी प्रकार का कोई भी जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध नही है, और ना ही कोई अच्छे जानकार डॉक्टर ही होते हैं। हालांकि कुछ समय के अंतराल पर ऐसे फर्जी अस्पतालों, तथा नर्सिंग होम के खिलाफ जिला स्तरीय पदाधिकारी के द्वारा अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन यह लोग उसका भी तोड़ निकाल कर पहले से ही रख लेते हैं।
जहां पदाधिकारियों के द्वारा जांच कर सील करने के बाद, उसी जगह पर किसी दुसरे नाम से अस्पताल शुरू कर दिया जाता है। जहां डॉक्टर भी वही रहते हैं, केवल अस्पताल का नाम बदल दिया जाता है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले भी इसी बाबा अस्पताल में, एक बच्चे की मौत हो गई थी। जिसके बाद मृत बच्चे के परिजनों ने जमकर हंगामा व तोड़फोड़ भी किया था।
यही नहीं दलसिंहसराय अनुमंडल क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित सभी अस्पतालों को मिलाकर, तकरीबन रोजाना 5-7 नवजात शिशुओं की मौत भी हो जाती है, लेकिन इस पर ना तो स्थानीय पुलिस प्रशासन की नजर पड़ती है, और ना ही बिहार प्रशासनिक सेवा के लोग ही कुछ कर पातें हैं।
अकेले अनुमंडलीय अस्पताल के आसपास तकरीबन दो दर्जन से अधिक फर्जी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन आंखें बंद करके काम कर रही है। जबकि अनुमंडल स्तर के सभी अधिकारी व पदाधिकारी का आवास व कार्यालय इन फर्जी अस्पतालों के आस पास ही है, बाबजूद कुछ भी एक्शन नही होना काफी दुख की बात है।
अनुमंडलीय अस्पताल दलसिंहसराय के एक कर्मी ने, पहचान उजागर नही करने की शर्त पर बताया कि, सरकारी अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी तथा कुछ डॉक्टर खुद, मरीजों को इन निजि क्लिनिक में ईलाज कराने के लीए भेज देते हैं। जबकि नियम ऐसा हैं कि, किसी भी सरकारी अस्पताल के सामने, अथवा आसपास निजी नर्सिंग होम या निजी ट्रामा सेंटर वगैरह का संचालन वर्जित है।
ऐसा करने पर जुर्माने का प्रावधान है। बाबजूद दलसिंहसराय प्रशासन के नाक के नीचे सैकड़ो की संख्या में फर्जी अस्पताल संचालित की जाती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी तक नही है।







