अरविन्द कुमार/अमित कुमार:[उजियारपुर] उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के खिलाफ, शराब माफियाओं से सांठगांठ रखने वाले निजी चालक को, थाना में रखकर थाना क्षेत्र के शराब माफियाओं से अवैध राशि की उगाही कराने, तथा शराब बरामदगी मामले में उजियारपुर थाना कांड संख्या 129/24 के नामजद अभियुक्त मनिष कुमार चौरसिया को थाना पर लाकर, थाना परिसर से ही लाखों रूप्ये की अवैध उगाही कर, थाना पर से ही छोड़ दिए जाने का संगीन आरोप लगने के करीब एक माह बीत चुका है, लेकिन समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक के द्वारा, उक्त थानाध्यक्ष के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।

जबकि उजियारपुर थाना क्षेत्र से संबंधित जानकारी रखने वाले लोगों, तथा उजियारपुर थाना में कार्यरत सभी चौकीदार, व जुलाई माह तक उजियारपुर थाना में पदस्थापित सभी पुलिस पदाधिकारियों से अगर पूछताछ की जाती है तो, शराब माफिया को थाना पर लाकर थाना पर से छोड़ देने तथा, कार्रवाई से बचने के लिए थाना में लगे सीसीटीवी फुटेज को सीसीटीएनएस (CCTNS) को करीब 20 – 25 हजार रूपए की बतौर रिश्वत देकर, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को डिलीट करवा देने आदि की बातें भी सामने आ सकती हैं।
आपको बता दें कि उजियारपुर थाना के ही एक पूर्व थानाध्यक्ष पर, यह आरोप लगा था कि उनके थाना में एक प्राईवेट डाटा इंट्री ऑपरेटर काम करता है। इस आरोप के लगते हीं पुलिस अधीक्षक के द्वारा, मात्र 10 दिनों के अंदर उक्त थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया था, लेकिन आज उजियारपुर थाना के वर्तमान थानाध्यक्ष पर, इतने बड़े गंभीर आरोप लगने के बाद भी, उसकी जांच जिलास्तरीय पुलिस पदाधिकारी से गुप्त तरीके से क्यूं नही करायी गयी ? सुत्रों का बताना है कि इस मामले में थानाध्यक्ष पर लगे आरोपों की ईमानदारी पूर्वक जांच ही नही की गयी है, जबकि उस घटना से संबंधित कई ऑडियो क्लीप तक, विभाग के सभी पुलिस पदाधिकारी को उपलब्ध करायी जा चुकी है। विभागीय जांच ही सही ढंग से नही होने के कारण, आज तक उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।
यही नहीं इसी तरह का एक मामला कुछ दिनों पुर्व ही सरायरंजन थाना से भी सामने आया है। जहां के थानाध्यक्ष रविकांत कुमार के खिलाफ करीब 20 दिन पूर्व ही, यह आरोप लगा था कि सरायरंजन थानाध्यक्ष रविकांत कुमार, अपने पदस्थापन थाना में निजी डाटा-इंट्री ऑपरेटर से थाना का काम करवाते हैं।
जिससे संबंधित रिपोर्ट पुलिस उपाधीक्षक सदर सह एएसपी समस्तीपुर, संजय कुमार पांडे के द्वारा करने के मात्र 24 घंटे के अंदर, उक्त थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए, पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर ने निलंबित भी कर दिया था। मगर उजियारपुर थानाध्यक्ष के खिलाफ इतना बड़ा आरोप लगने के बाद भी, वरीय पुलिस पदाधिकारियों के द्वारा विभागीय कार्रवाई नही किया जाना, संशय की स्थिति उत्पन्न करता है।
जबकि उजियारपुर थाना के पूर्व थानाध्यक्ष व सरायरंजन थाना के पूर्व थानाध्यक्ष रविकांत कुमार के खिलाफ भी एक ही प्रकार का आरोप लगने पर एक लाईन हाजिर तो दुसरे निलंबित कर दिए गए, लेकिन यहां तो इतना बड़ा आरोप लगने के बाद भी, उजियारपुर थानाध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गयी है!
आखिर क्यों ? आखिर उजियारपुर थानाध्यक्ष के मामले विभाग के वरीय पदाधिकारी इतने मेहरबान क्यूं हैं ? सुत्रों का बताना है कि, शराब मामले में गिरफ्तार मनिष चौरसिया को थाना पर लाकर छोड़ दिए जाने के बाद, थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने सीसीटीएनएस (CCTNS) कर्मी की मदद से घटना तिथि से करीब 04 माह पूर्व तक का सीसीटीवी (CCTV) फूटेज डिलीट करवाकर, एक सनहा दर्ज कर लिया है।
अब इस मामले में सवाल यह उठता है कि, आखिर बार बार उजियारपुर थाना का ही सीसीटीवी फूटेज डिलीट क्यूं और कैसे हो जाता हैं ? अगर टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण सीसीटीवी (CCTV) फुटेज डिलीट हुआ है तो उसकी एफएसएल (FSL) जांच क्यूं नही करायी गयी ? अगर सीसीटीवी (CCTV) फूटेज की FSL जांच करायी जाती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि, CCTV फूटेज डीलीट हो गयी थी या डीलीट की गयी थी ? हालांकि इस तरह के आरोपों में विभागीय कार्रवाई नही होना भी अपने-आप में एक सवाल पैदा करता है।
ज्ञात हो कि उपरोक्त मामलों से संबंधित शिकायती आवेदन पत्र भी, उजियारपुर थाना क्षेत्र के एक जदयू नेता ने, पुलिस विभाग से संबंधित सभी पदाधिकारियों को उपलब्ध कराकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के द्वारा की जानेवाली नए-नए करामात से संबंधित एक CCTV फूटेज भी वायरल हो रही है। जिससे संबंधित अगली खबर बुधवार 28 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी। कृप्या ईंतजार करें!!







