समस्तीपुर/बेगुसराय। बेगुसराय जिले के बछवाड़ा थाना अंतर्गत चिरंजीवीपुर गांव निवासी, एक व्यक्ति की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गयी। सुचना मिलने के बाद बछवाड़ा थाने की पुलिस, मृतक के पैतृक गांव पहुंच शव को अपने कब्जे में लेकर, पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल बेगुसराय भेज मामले की छानबीन में जुट गयी है।

मृत युवक की पहचान बछवाड़ा थाना क्षेत्र के चिरंजीवीपुर पंचायत स्थित वार्ड 2 निवासी, स्वर्गीय वशिष्ठ नारायण सिंह के 28 वर्षिय पुत्र संदीप सिंह के रूप में की गयी है। घटना के संबंध में विश्वसनीय सुत्रों का बताना है कि, मृतक निजि अस्पताल संचालक था।
वह बेगुसराय में अपना निजि क्लिनिक संचालित करता था। जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। इधर करीब 6 साल पुर्व मृतक ने समस्तीपुर जिला के विभूतिपुर थाना अंतर्गत, एक गांव की लड़की से प्रेम विवाह किया था। जिसके साथ वह दलसिंहसराय बाजार में किराए का रूम लेकर काफी दिनों से रह रहा था। घटना की रात अर्थात सोमवार 14 अप्रैल की रात भी, मृतक बेगुसराय अपने निजि क्लिनिक से सीधा दलसिंहसराय बाजार अपनी पत्नी के पास पहुंचा था।
जहां उसकी संदिग्ध हालत में मंगलवार 15 अप्रैल की अहले सुबह करीब 2 बजे मौत हो गयी। हालांकि इस संबंध में सुत्रों का यह भी बताना है कि, मृत युवक से, चिरंजीवीपुर गांव के ही किसी भूमाफिया ने डरा-धमकाकर या बहला-फुसलाकर, करीब 40-50 लाख की जमीन करीब 5-7 लाख रूपए में रजिस्ट्री करबा लिया था, तथा मृतक को मात्र एक लाख रूपए ही तत्काल दिया था।
जिसके कारण मृतक का अपनी पत्नी के साथ विवाद भी हो रहा था। इसी बीच अचानक उक्त युवक की मौत हो जाना संशय उत्पन्न कर रहा है। हालांकि घटना के संबंध में मृतक के परिजन का बताना है कि, मृतक रात को खाना खाकर सो गया था। देर रात को अचानक उसके पेट में तेज दर्द होने लगा। जिसे ईलाज के लिए दलसिंहसराय के एक निजि अस्पताल में ले जाया गया।
जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मृत युवक के शव को नजदीक से देखने वाले लोगों का बताना है कि, मृतक के गले पर “O” सेप में काला निशान बना हुआ है। जिससे आशंका यह जतायी जा रही है कि, शायद उक्त युवक की गला घोंटकर हत्या की गयी है। हालांकि यह हत्या है या स्वभाविक मौत! इसका खुलासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
वहीं इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए जब बछवाड़ा थानाध्यक्ष के सरकारी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गयी तो, पुरा रिंग होने के बाद भी थानाध्यक्ष ने कॉल रिसीव नही किया। जिसके कारण थानाध्यक्ष बछवाड़ा का पक्ष नही जाना जा सका।







