समस्तीपुर। महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित माहौल देने का सरकारी दावा जिले में सवालों के घेरे में है। बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गठित ‘अभया ब्रिगेड’ टीम जमीनी स्तर पर नदारद नजर आ रही है।

अभया ब्रिगेड को स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर के आसपास निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर वाहन भी उपलब्ध कराए गए। बावजूद इसके, हकीकत यह है कि इन संवेदनशील जगहों पर टीम कहीं दिखाई नहीं देती।
छात्राओं का कहना है कि सड़कों पर मनचलों के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं, क्योंकि पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आती। जिले के कई हिस्सों में अभया ब्रिगेड की मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
हाल के दिनों में विभूतिपुर थाना क्षेत्र में एक छात्रा से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। वहीं मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र में छेड़छाड़ से परेशान एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
इन घटनाओं के बाद भी अभया ब्रिगेड की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि जब सुरक्षा के लिए विशेष टीम बनाई गई है, तो उसकी सक्रियता जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखती।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक अभया ब्रिगेड सक्रिय होगी?
या फिर यह टीम सिर्फ सरकारी फाइलों और घोषणाओं तक ही सिमटकर रह जाएगी? जरूरत है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान ले, अभया ब्रिगेड को सक्रिय करे और स्कूल-कॉलेज क्षेत्रों में नियमित गश्त सुनिश्चित करे, ताकि महिलाओं और छात्राओं में सुरक्षा का भरोसा बहाल हो सके।







