समस्तीपुर। जिले के विभिन्न थानों में थानाध्यक्ष के पद पर तैनात पुलिस पदाधिकारी कितने ज्ञानी महापुरुष हैं, और उनके पास बीएनएस की कितनी समझ है, इसका उदाहरण अक्सर सामने आता ही रहता है। कोई थानाध्यक्ष जीवित व्यक्ति को मृत साबित कर देता है, तो कोई थानाध्यक्ष नामजद आरोपित के जगह उसके पिता को गिरफ्तार कर लेता है। हद तो तब हो जाती है जब कोई थानाध्यक्ष वायरल विडियो की बिना जांच किए, और बगैर अल्कोहल की पुष्टि के उसे शराब धंधेबाज साबित कर देता है। ऐसा हो भी क्यों नही! जब अहिंसा के पुजारी वाली तस्वीर का पेपर देकर थानाध्यक्ष बनेंगे तो यही सब होगा।

ताजा मामला उजियारपुर थाना अंतर्गत बैकुंठपुर ब्रह्णडा गांव की है। जहां भूमि विवाद मामले में उजियारपुर थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए, घटना के आरोपितों की जगह उसके पिता को गिरफ्तार कर पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय भेज दिया। जहां न्यायालय ने वाद के अनुसंधानकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए, पुलिस द्वारा गिरफ्तार दोरिक महतो को जमानत पर छोड़ दिया। घटना सोमवार 04 मई की बतायी जा रही है।
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार उजियारपुर थाना क्षेत्र के बैकुंठपुर ब्रह्ण्डा गांव निवासी शंकर महतो ने, शुक्रवार 08 मई को उजियारपुर थाना को आवेदन देकर बताया कि, उनके भाई दोरिक महतो के साथ विगत कई वर्षों से जमीनी विवाद चला आ रहा है। जिस विवाद को सुलझाने के लिए कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
घटना के दिन सोमवार 04 मई को उसी जमीनी विवाद को लेकर दोरिक महतो का बेटा राकेश महतो, पुत्रवधु लक्ष्मी देवी व पोता गोलू कुमार उनके दरवाजे पर पहुंचा, तथा मारपीट कर जख्मी कर दिया। जिसके बाद वह घायल अवस्था में ही वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उजियारपुर पहुंचे और अपना ईलाज कराकर उजियारपुर थाना को शुक्रवार 08 मई को आवेदन सौंपा।
थानाध्यक्ष उजियारपुर ने भी घटना से संबंधित आवेदन मिलने के बाद ईमानदारी का परिचय देते हुए घटना से संबंधित प्राथमिकी दर्ज करते हुए, 08 मई की रात को ही तीनों आरोपितों को छोड़कर, घटना के आरोपित के पिता दोरिक महतो को गिरफ्तार कर लिया, व आवश्यक कागजी प्रक्रिया के बाद पुलिस अभिरक्षा में दलसिंहसराय न्यायालय भेज दिया।
वहीं सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न्यायालय में नामजद आरोपित के जगह उसके पिता की गिरफ्तारी होने से न्यायालय ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए, वाद के अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी को भी कड़ी फटकार लगाई है। अब इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
थाना क्षेत्र के लोगों का बताना है कि, इस तरह के मामलों के सामने आने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि, पुलिस वालों के पास भारतीय न्याय संहिता (BNS) के जानकारी का घोर अभाव है, या अपनी पुलिसिया धौंस दिखाने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, दलसिंहसराय न्यायालय उजियारपुर थानाध्यक्ष अजीत कुमार के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।








