उजियारपुर गैंगरेप मामला: मुख्य आरोपी ने थाने पहुंचकर किया आत्मसमर्पण या हुई गिरफ्तारी? पुलिस के दावे पर उठे सवाल।

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समस्तीपुर। उजियारपुर थाना क्षेत्र में विगत दिनों एक नाबालिग दलित छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले के मुख्य नामजद आरोपी आदित्य कुमार ने गुरुवार (23 जुलाई) को पतैली पूर्वी पंचायत के मुखिया सुनील झा के साथ उजियारपुर थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। आरोपी की पहचान रायपुर निवासी अशोक चौधरी के पुत्र आदित्य कुमार के रूप में हुई है।

पतैली पूर्वी पंचायत के मुखिया सुनील झा ने बताया कि आरोपी के परिजनों का कहना है कि आदित्य कुमार निर्दोष है और उसे एक साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि कानून और न्यायपालिका पर विश्वास रखते हुए परिवार ने स्वयं आरोपी को थाना लाकर पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।

आरोपी के दादा रविंद्र चौधरी ने बताया कि उनका पोता बिहार से बाहर रहकर पढ़ाई करता है और लगभग दस दिन पहले परीक्षा देने गांव आया था। उनका आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने की नीयत से षड्यंत्रपूर्वक आदित्य कुमार को इस मामले में फंसा दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आएगी।

इधर, पूरे घटनाक्रम के बीच समस्तीपुर पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि पुलिस के इस दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोपी के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि वह स्वयं मुखिया सुनील झा एवं अन्य लोगों के साथ उजियारपुर थाना पहुंचा और आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण के दौरान की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें आरोपी थाना परिसर में मुखिया एवं अन्य लोगों के साथ प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में किए गए “गिरफ्तारी” के दावे और परिजनों के “आत्मसमर्पण” के दावे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

वहीं, इस संबंध में अंचल निरीक्षक पिंकी प्रसाद ने कहा कि “आत्मसमर्पण न्यायालय में किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति थाना पर स्वयं भी उपस्थित होता है, तो विधिक प्रक्रिया के अनुसार उसे गिरफ्तारी ही माना जाता है।”

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