
समस्तीपुर। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद समस्तीपुर जिले में, शराब तस्करी और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर समय-समय पर विभिन्न पुलिस पदाधिकारियों की कार्यशैली चर्चा का विषय रही है। जिले में 2018 बैच के कई थानाध्यक्षों का कार्यकाल आज भी लोगों के बीच सख्त कानून व्यवस्था और शराब माफियाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए याद किया जाता है।
उस समय खानपुर थाना में मोहम्मद फहीम, उजियारपुर थाना में अनिल कुमार, बंगरा थाना में मनिषा कुमारी, वैनी थाना में आनंद शंकर गौरव तथा मुसरीघरारी थाना में फैजुल अंसारी जैसे अधिकारियों ने अपने-अपने थाना क्षेत्रों में शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया। स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा बनी कि इन अधिकारियों की सख्ती के कारण शराब कारोबारियों में भय का माहौल था और कई माफियाओं ने अवैध कारोबार से दूरी बना ली थी।
सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यकाल की चर्चा बंगरा थाना की तत्कालीन थानाध्यक्ष मनिषा कुमारी का माना जाता है। बंगरा थाना क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से काफी संवेदनशील रहा है, जहां दो जिलों की तीन सीमाएं जुड़ती हैं। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण शराब तस्करों के लिए यह इलाका हमेशा आसान मार्ग माना जाता रहा, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार मनिषा कुमारी के कार्यकाल में तस्करों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा रहा और बड़े स्तर पर नेटवर्क विकसित नहीं हो सका।
इसी प्रकार मुसरीघरारी थाना में तत्कालीन थानाध्यक्ष फैजल अंसारी ने लगातार छापेमारी और निगरानी अभियान चलाकर कथित रूप से शराब तस्करों के नेटवर्क को कमजोर कर दिया था। बताया जाता है कि उनकी कार्यशैली के कारण तस्करों ने उस क्षेत्र में सक्रिय होने से परहेज करना शुरू कर दिया था।
उजियारपुर थाना में तैनात रहे अनिल कुमार का कार्यकाल भी लोगों के बीच काफी चर्चित रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उनके रहते शराब माफियाओं का मनोबल काफी नीचे था और अवैध कारोबार करने वालों पर लगातार दबाव बना रहता था। वहीं वैनी थाना में आनंद शंकर गौरव की सख्ती भी लंबे समय तक चर्चा में रही। स्थानीय लोगों के अनुसार उनके कार्यकाल में खुलेआम शराब बिक्री की घटनाएं बेहद कम देखने को मिलती थीं।
खानपुर थाना में तत्कालीन थानाध्यक्ष मोहम्मद फहीम ने भी शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके नेतृत्व में कई कार्रवाईयों के बाद शराब कारोबारियों में पुलिस का खौफ बना रहा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि उस समय शराब की बरामदगी के मामले अपेक्षाकृत कम सामने आते थे। उनका तर्क है कि इसका कारण यह था कि पुलिस की सक्रियता के चलते तस्करों के लिए जिले में प्रवेश करना ही कठिन हो गया था। वहीं वर्तमान समय में बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने की घटनाओं को लेकर कुछ लोगों का कहना है कि तस्कर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस का पक्ष अलग हो सकता है, क्योंकि अधिक बरामदगी को पुलिस की सक्रिय कार्रवाई का परिणाम भी माना जा सकता है।
जिले के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का कहना है कि, समस्तीपुर में फिर से ऐसी ही सख्त, निष्पक्ष और प्रभावी पुलिसिंग की आवश्यकता है, जिससे शराबबंदी कानून का कड़ाई से पालन हो सके और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।






