
समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लखनीपुर महेशपट्टी में, मनरेगा योजना के तहत हुए एक बड़े घोटाले को दबाने की घिनौनी साजिश की जा रही है। इस साजिश में उजियारपुर मनरेगा पीओ महेश कुमार, पंचायत रोजगार सेवक संजीव कुमार गिरी, कनीय अभियंता सचिन कुमार, तथा मनरेगा कार्यालय कर्मी अजबलाल राय सहित लखनीपुर महेशपट्पटी पंचायत के कुछ मनरेगा माफिया भी शामिल हैं।
इस पंचायत में संचालित मनरेगा की योजनाओं में मनरेगा माफियाओं ने कागज़ों पर 95% फर्जी मज़दूरों की हाजिरी बनाकर करीब 3 लाख 21 हजार 5 सौ रूपए डकारने की तैयारी थी। इसी बीच स्थानीय लखनीपुर महेशपट्टी निवासी पेशे से पत्रकार श्याम कुमार शर्मा ने इसकी शिकायत दर्ज करा दी। जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। जिसके बाद समस्तीपुर डीआरडीए (DRDA) के अधिकारी जांच करने पहुंचे, और हद तो तब हो गयी जब जांच पदाधिकारी ने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने के लिए एक ‘फर्जी और मनगढ़ंत’ जांच रिपोर्ट विभाग सौंप दिया
लेकिन इस मामले में नया मोड़ उस वक्त आ गया जब शिकायकर्ता ने के शिकायत की जांच करने कार्यस्थल पर पहुंचे पदाधिकारी का विडियो रिलीज कर दिया। जिस विडियो में साफ साफ देखा जा सकता है कि, पदाधिकारी जांच करने तो आए लेकिन गाड़ी से उतरकर उन्होंने कार्यस्थल को एक बार अपनी आंखों से देखा और चलते बने। जिससे स्पष्ट होता है कि, जांच पदाधिकारी ने जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। जिसके बाद अब यह मामला राज्य के नोडल अधिकारी और ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली तक पहुँच चुका है।
आपको बता दें कि, लखनीपुर महेशपट्टी में एक बड़े सिंडिकेट जिसमें BPO, PRS JE और कुछ मनरेगा माफिया शामिल है के द्वारा, मनरेगा के तहत चार योजनाओं जिसका कोड संख्या- 20655194, 20663561, 20660752, व 20646304 है, में बिना कोई भौतिक कार्य किए पैसे निकालने का खेल चल रहा था। इसके लिए 1286 मानव दिवस का फर्जी मस्टर रोल तैयार किया गया। यही नहीं! हद तो तब हो गई जब बिहार के बाहर रहने वाले प्रवासी मज़दूरों को भी कार्यस्थल पर काम करते हुए दिखा दिया गया। एक पुख्ता शिकायत के बाद इन योजनाओं का पेमेंट फ्रीज़ कर दिया गया था।
CPGRAMS पर हुई शिकायत के बाद समस्तीपुर DRDA से सहायक अभियंता (AE) सुधांशु कुमार और मनरेगा जेई (JE) सचिन कुमार कार्यस्थल पर जांच करने पहुँचे, लेकिन उनका यह जांच महज एक दिखावा था। AE ने अपनी रिपोर्ट में योजना को “संतोषप्रद” बताकर केस बंद करने की सिफारिश कर दी, लेकिन उनके द्वारा सौंपे गए इस रिपोर्ट में कई विरोधाभास नजर आ रहे हैं।
जांच पदाधिकारी ने अपने रिपोर्ट में यह नही दर्शाया की जिस बाहा उड़ाही के नाम पर वह लाखों के घोटाले पर पर्दा डाल रहे हैं, उस बाहा उड़ाही में निकलने वाला मिट्टी कहां गया, क्योंकि मौके पर बाहा के दोनों किनारों पर कोई ताजी खोदी गई मिट्टी नहीं है। सिर्फ कुछ मज़दूरों को लगाकर जंगल और झाड़ियाँ साफ करवा दी गईं।
यही नही जांच पदाधिकारी AE ने स्वीकृत प्राक्कलन और मापी पुस्तिका के आधार पर कोई भौतिक नापी भी नहीं किया, और बिना मापी के ही बंद कमरे में जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई। इस दौरान जांच अधिकारियों ने जानबूझकर यह बात भी छिपा ली कि, जिस नाले की उड़ाही का पैसा निकाला जा रहा है, उस नाले पर महज़ 2 वर्ष पहले ही उड़ाही का कार्य सफलतापूर्वक कराकर राशि की निकासी भी की जा चुकी है।
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि, जिस जांच रिपोर्ट में एक प्रवासी मज़दूर प्रेमचंद सिंह के हाथ से लिखा हुआ एक स्व-घोषणा पत्र संलग्न किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि वह गाँव में रहकर ही काम कर रहा था। वह घोषणा पत्र भी फर्जी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा पत्र ठेकेदार द्वारा फर्जी हस्ताक्षर करके बनवाया गया है। जिसे जांच अधिकारी ने जानबूझकर उस मज़दूर की मोबाइल लोकेशन और बैंक/एटीएम ट्रांजेक्शन आदि की जांच नहीं की, क्योंकि वैज्ञानिक जांच होते ही अधिकारी और ठेकेदार दोनों जेल चले जाते।
अब जब स्स्थास्था जांच अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार के खेल में शामिल होते दिख रहे हैं, इसलिए आवेदक ने उन अधिकारियों के खिलाफ ही शिकायत सीधे राज्य के नोडल अधिकारी और भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय को कर दी है। जिसमें शिकायतकर्ता ने यह मांग किया है कि, जांच पदाधिकारी डीआरडीए के AE द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को तुरंत रद्द किया जाए, राज्य स्तरीय विजिलेंस टीम या स्वतंत्र कार्यपालक अभियंता से कार्यस्थल की दोबारा भौतिक नापी कराई जाए, कथित मज़दूरों की मोबाइल लोकेशन की वैज्ञानिक जांच कराई जाए, फर्जी दस्तावेज (हस्ताक्षर) सौंपने और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में BPO, PRS सहित प्रशासनिक स्वीकृति देने वाले जनप्रतिनिधी पर IPC की धारा 467/468 के तहत FIR दर्ज की जाए।
आपको बता दें कि, समस्तीपुर जिला प्रशासन हमेशा से पारदर्शी जांच के दावे करता रहा है, लेकिन लखनीपुर महेशपट्टी के इस मामले ने, सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है।अब देखना यह दिलचस्प होगा कि समस्तीपुर जिलाधिकारी व उप-विकास आयुक्त इस वीडियो सबूत और फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर भ्रष्ट सिंडिकेट पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हैं, या नही, या फिर यह पूरी व्यवस्था इसी तरह ठेकेदारों की जेब में समाई रहेगी?







