उजियारपुर (समस्तीपुर): भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण उजियारपुर प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में देखने को मिल रहा है। यहाँ वार्ड संख्या 01 से 07 तक में मनरेगा (MGNREGA) योजना के क्रियान्वयन के नाम पर करोड़ों की राशि की लूट का मामला प्रकाश में आया है। हैरत की बात यह है कि लिखित शिकायत के एक महीने बाद भी मनरेगा कार्यालय ने स्थल निरीक्षण तक करने की जहमत नहीं उठाई है।

कागजों पर ‘विकास’, धरातल पर ‘विनाश’
लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत के वार्ड संख्या 01 से 07 तक में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता बरती गई है। मिट्टी भराई, ईंट सोलिंग, पीसीसी सड़क निर्माण, पेवर ब्लॉक, बाहा उड़ाही, वृक्षारोपण सहित अन्य विकास कार्यों के नाम पर, सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये तो निकाल लिए गए, लेकिन धरातल पर काम की गुणवत्ता शून्य है। कई जगहों पर तो बिना काम किए ही मास्टर रोल भरकर राशि की निकासी कर ली गई है।
पीओ (PO) कार्यालय की चुप्पी पर सवाल
भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर करने के लिए स्थानीय जागरूक नागरिकों द्वारा कार्यक्रम पदाधिकारी (PO), मनरेगा कार्यालय, उजियारपुर को लिखित शिकायत पत्र भी उनके सोशल एकाउंट WhatsApp पर सौंपा गया था। जिसमें स्पष्ट रूप से स्थल निरीक्षण कर जांच की मांग की गई थी। लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद आज तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। प्रशासन की यह सुस्ती कई सवाल खड़े करती है, क्या भ्रष्टाचार को ऊंचे स्तर पर संरक्षण प्राप्त है? एक महीने तक जांच टीम का न पहुंचना क्या दोषियों को साक्ष्य मिटाने का मौका देना है? क्या जनता की शिकायत पत्र को पदाधिकारी कूड़ेदान में डाल देते हैं ?
ग्रामीणों में गहरा रोष
लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत के वार्ड 01 से 07 के निवासियों का कहना है कि मजदूरी के नाम पर बिचौलियों और ‘गुर्गों’ के बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ है, जबकि असल मजदूर आज भी काम के लिए भटक रहे हैं। जिसका जांच जरूरी है। इस मामले की यदि जल्द ही उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है तो, जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन की जाएगी। आपको बता दें कि, मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाना न केवल अपराध है, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर डाका है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘महा-लूट’ पर कब संज्ञान लेता है या फिर अधिकारी फाइलों को दबाकर भ्रष्टाचार को पालते रहेंगे।







