सरकारी नौकरी व्यवस्था पर युवाओं का बढ़ता मोहभंग, लेखिका शालिनी सिन्हा ने व्यवस्था पर उठाए तीखे सवाल

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सीवान। देश में सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं के बीच बढ़ती निराशा और परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर मुक्त लेखिका एवं पत्रकार शालिनी सिन्हा ने तीखा लेख लिखकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने युवाओं से सरकारी नौकरी के “ट्रैप” से बाहर निकलकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ने की अपील की है।

अपने विस्तृत लेख में शालिनी सिन्हा ने कहा कि आज करोड़ों युवाओं का भविष्य सरकारी नौकरियों पर टिका हुआ है, लेकिन जिस तंत्र पर युवाओं का भरोसा है वही भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और लालफीताशाही से ग्रसित हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा एजेंसियां और सरकारी संस्थाएं अभ्यर्थियों की मेहनत, मानसिक दबाव और आर्थिक संघर्ष को नजरअंदाज कर रही हैं।

लेख में उन्होंने लिखा कि एक अभ्यर्थी को फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा और साक्षात्कार तक लंबी आर्थिक व मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। कई युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने, परिणाम में देरी या अन्य अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है।

शालिनी सिन्हा ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेजों की पढ़ाई प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी नहीं रह गई है। छात्रों को अलग से कोचिंग और तैयारी का बोझ उठाना पड़ता है, जबकि सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि देश चलाने वाले नेताओं के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता या परीक्षा आवश्यक नहीं है, जबकि सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं को कई चरणों से गुजरना पड़ता है।

उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि केवल सामाजिक दबाव और “सरकारी नौकरी ही सुरक्षित भविष्य है” जैसी सोच के कारण इस व्यवस्था में फंसना उचित नहीं है। उनके अनुसार आज निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और व्यवसाय में भी बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।

लेख के अंत में उन्होंने कहा कि यदि युवा सामूहिक रूप से सरकारी नौकरियों की तैयारी और परीक्षाओं का बहिष्कार करें, तो सरकार और व्यवस्था को युवाओं की वास्तविक स्थिति समझनी पड़ेगी। उन्होंने व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि छोटे-मोटे सुधार अब पर्याप्त नहीं हैं।

गौरतलब है कि शालिनी सिन्हा पत्रकारिता, साहित्य और अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। उन्हें “Youngest Female Writer with Most Diverse Literary and Journalistic Forms” के लिए विश्व रिकॉर्ड तथा “Most Prolific Author in Multiple Categories” के लिए राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी प्राप्त है।

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