समस्तीपुर। समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत लगुनियां रघुकंठ एवं लगुनियां सूर्यकंठ गांव के बीच, जमुआरी नदी पर बना एकमात्र पुल पिछले करीब दो माह से टूटकर धराशायी पड़ा हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि, दो माह से भी अधिक का समय बीत जाने के बाद भी, स्थानीय लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि, आखिर इस पुल को किस विभाग द्वारा और किस उद्देश्य से तोड़ा गया है। पुल निर्माण स्थल के आसपास कहीं भी किसी निर्माण एजेंसी, संवेदक या विभाग का बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे लोगों को यह जानकारी मिल सके कि, यहां नया पुल बनाया जाना है या नहीं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह पुल कई वर्षों से आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों के लिए आवागमन का मुख्य सहारा था। पुल को तोड़ दिए जाने के बाद अब लोगों को लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे छात्रों, किसानों, मरीजों एवं दैनिक कामकाज करने वाले लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि, पुल टूटने के बाद वहां एक अस्थायी डायवर्सन बनाया गया है, लेकिन उसकी हालत भी बेहद खराब है। मामूली बारिश में ही डायवर्सन टूटने लगा है और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। अंधेरा होने के बाद यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अक्सर बाइक और साइकिल सवार असंतुलित होकर गिर जाते हैं, जिससे कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि, इस डायवर्सन पर रोशनी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। रात के समय राहगीरों को भारी जोखिम उठाकर इस डायवर्सन से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
इलाके के लोगों में इस बात को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि, पुल का निर्माण किसी सरकारी विभाग के द्वारा कराया जा रहा है, या फिर बिना किसी सूचना के पुल को तोड़ दिया गया है, क्योंकि कि यदि पुल निर्माण की योजना है, तो प्रशासन और निर्माण एजेंसी को स्थल पर सूचना बोर्ड लगाकर निर्माण अवधि एवं योजना की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया है कि, जल्द से जल्द मामले की जांच कराई जाए तथा पुल निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। साथ ही सुरक्षित एवं मजबूत वैकल्पिक मार्ग, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है तथा कई गांवों का संपर्क पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो जाएगा। जिससे यहां के लोगों का जिला मुख्यालय से पुरी तरह संपर्क टूट जाएगा।
आपको बता दें कि, किसी भी सड़क या पुल निर्माण के दौरान बनाया जाने वाला डायवर्सन (वैकल्पिक रास्ता) केवल मिट्टी डालकर छोड़ देने का नाम नहीं है। इसके लिए सुरक्षा और तकनीकी मानक तय होते हैं। सामान्यतः डायवर्सन ऐसा बनाया जाता जिसकी सतह मजबूत एवं समतल हो, ताकि बारिश में टूटे ना! सबसे पहले गिट्टी, मिट्टी को रोलर से अच्छी तरह दबा दिया जाता है, ताकि डायवर्सन पुरी तरह मजबूत हो!
अगर डायवर्सन किसी नदी पर बनना है तो, उसके किनारे सुरक्षा के दृष्टिकोण से मजबूत बैरिकेडिंग या रेलिंग लगाना आवश्यक होता है, साथ ही खतरनाक जगहों पर चेतावनी पट्ट व रात में रोशनी की व्यवस्था जैसे स्ट्रीट लाइट या सोलर लाइट लगाना भी जरूरी होता है, तथा रिफ्लेक्टर और चमकदार संकेतक भी लगाए जाते हैं। साथ ही चेतावनी बोर्ड भी लगाया जाता है, जिसमें “धीरे चलें”, “डायवर्सन आगे है”, “निर्माण कार्य जारी है” जैसे बोर्ड लगे रहते हैं, साथ ही बोर्ड पर निर्माण एजेंसी और विभाग का नाम भी लिखा होता है।
डायवर्सन पर पानी जमा ना हो इसके लिए नाला या पाइप की व्यवस्था, नदी किनारे कटाव रोकने के लिए बोल्डर या मिट्टी की व्यवस्था, वाहनों के लिए पर्याप्त चौड़ाई, बाइक, साइकिल, एंबुलेंस और छोटे वाहनों के सुरक्षित आवागमन लायक चौड़ाई होना जरूरी है। यही नही! निर्माण एजेंसी के द्वारा उक्त डायवर्सन की नियमित निगरानी व समय-समय पर मरम्मत भी किया जाना रहता है।







