समस्तीपुर में 2019 बैच के दारोगा को आखिर क्यूं नही मिल रही थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी ? थानाध्यक्ष बनने के काबिल नहीं या मामला है कुछ और?

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं


समस्तीपुर। जिला पुलिस व्यवस्था में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि जब बिहार के कई जिलों में 2019 बैच के दारोगाओं (SI) को थानों की कमान सौंपकर थानाध्यक्ष बनाया जा रहा है, तो आखिर समस्तीपुर में अब तक इस बैच के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी क्यों नहीं दी जा रही है?

पुलिस विभाग के अंदर और आम लोगों के बीच भी यह चर्चा तेज हो गई है कि, जिले में कई ऐसे युवा और ऊर्जावान दारोगा मौजूद हैं, जिन्होंने कठिन से कठिन मामलों का सफल उद्भेदन कर अपनी कार्यक्षमता साबित की है, बावजूद इसके उन्हें थानाध्यक्ष बनने का मौका नहीं मिल रहा है।

सूत्रों की मानें तो समस्तीपुर जिले के विभिन्न थानों में बीते समय में कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें पुलिस लंबे समय तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही थी। हत्या, लूट, चोरी और अन्य गंभीर मामलों में सुराग तक नहीं मिल रहा था। ऐसे मामलों में 2019 बैच के कुछ दारोगाओं ने, अपनी सूझबूझ, तकनीकी जांच और लगातार प्रयास के दम पर, ऐसे मामलों का खुलासा कर पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा बचाने का काम किया है।

बताया जाता है कि, कई मामलों में इन अधिकारियों ने न केवल अपराधियों तक पहुंच बनाई, बल्कि साक्ष्य जुटाकर पूरे घटनाक्रम का सफल उद्भेदन भी किया। इसके बाद भी उन्हें थाना संचालन की जिम्मेदारी नहीं मिलना कई लोगों को हैरान कर रहा है।

पुलिस महकमे से जुड़े जानकारों का कहना है कि, वर्तमान समय में अपराध नियंत्रण और जनता से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए युवा एवं सक्रिय अधिकारियों को नेतृत्व का मौका देना जरूरी है। बिहार के कई जिलों में इसी सोच के तहत 2019 बैच के दारोगाओं को थानाध्यक्ष बनाया गया है, और वहां बेहतर परिणाम भी देखने को मिले हैं।

समस्तीपुर में हालांकि स्थिति अलग दिखाई दे रही है। यहां अब तक अधिकतर थानों की कमान पुराने और वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों में ही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में युवा अधिकारियों की क्षमता पर भरोसा नहीं किया जा रहा है, या फिर इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है?

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि, जिन अधिकारियों ने कठिन मामलों को सुलझाकर अपनी काबिलियत साबित की है, उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। लोगों का कहना है कि नई सोच और आधुनिक जांच पद्धति अपनाने वाले युवा पुलिस अधिकारियों को मौका मिलने से अपराध नियंत्रण में और सुधार आ सकता है।

इस संबंध में अधिकारिक बयान के लिए पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर के सरकारी मोबाइल नंबर पर मामले से संबंधित मैसेज कर जानकारी भी मांगी गयी! लेकिन इस पूरे मामले पर पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन पुलिस महकमे के अंदर यह चर्चा जरूर तेज है कि, अगर दूसरे जिलों में 2019 बैच के दारोगाओं को थानाध्यक्ष बनाया जा सकता है तो, समस्तीपुर में उन्हें यह जिम्मेदारी देने में आखिर हिचकिचाहट क्यों है।

जबकि जिला के संभवतः सभी थानों में 2019 बैच के कई ऐसे दारोगा पदस्थापित हैं, जिन्होंने अपनी सुझ-बूझ व बुद्धिमता का परिचय देते हुए, ब्लांईड केस जिसमें कोई सुराग तक उपलब्ध नही था, का सफल उद्भेदन कर चुके हैं। ऐसे में अगर इन दारोगा को थाने की कमान दी जाती है तो, निश्चिंत तौर पर अन्य जिलों की तरह समस्तीपुर में भी अपराधिक घटनाओं में कमी आएगी।

अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पुलिस विभाग इस दिशा में कोई बड़ा निर्णय लेता है, या फिर 2019 बैच के दारोगाओं को थानाध्यक्ष बनने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *