समस्तीपुर। उजियारपुर थाना क्षेत्र के भगवानपुर देसुआ में एसटीएफ एवं डीआईयू की कार्रवाई के दौरान हुए कथित एनकाउंटर के बाद, अब पुलिस कार्रवाई से ज्यादा चर्चा पुलिस अधिकारियों की वर्दी को लेकर हो रही है। घटनास्थल एवं सदर अस्पताल से सामने आई तस्वीरों में जहां समस्तीपुर एसपी समेत अन्य पुलिस पदाधिकारी वर्दी में नजर आ रहे हैं, वहीं उजियारपुर थानाध्यक्ष सिविल ड्रेस में दिखाई दे रहे हैं। इस मामले को लेकर जिले में तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं।
आपको बता दें कि, बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा पहले ही स्पष्ट आदेश जारी किया जा चुका है कि, ड्यूटी के दौरान कोई भी पुलिस पदाधिकारी अथवा कर्मी बिना वर्दी के नहीं रहेगा। डीजीपी का मानना है कि वर्दी पुलिस की पहचान, अनुशासन और जवाबदेही का प्रतीक है। इसके बावजूद एक बड़े पुलिस ऑपरेशन और एनकाउंटर के दौरान थानाध्यक्ष का सिविल ड्रेस में मौजूद होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
क्या कहते हैं डीजीपी बिहार के निर्देश
डीजीपी बिहार ने पूर्व में सभी जिलों के एसपी, डीएसपी एवं थानाध्यक्षों को निर्देश दिया था कि, ड्यूटी के समय पुलिसकर्मी अनिवार्य रूप से निर्धारित वर्दी में रहें। आदेश में यह भी कहा गया था कि, बिना वर्दी ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। विशेष रूप से कानून-व्यवस्था, छापेमारी, गश्ती एवं सार्वजनिक कार्रवाई के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य बताया गया था।
सूत्रों के अनुसार, डीजीपी मुख्यालय की ओर से यह भी कहा गया था कि, कई मामलों में पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस का दुरुपयोग करते हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इसी कारण सख्ती से वर्दी नियम लागू करने का निर्देश जारी किया गया था।
एनकाउंटर के बाद नया विवाद
उजियारपुर थाना क्षेत्र में बुधवार 20 मई की अहले सुबह एसटीएफ एवं डीआईयू के द्वारा की गई कार्रवाई में एक कथित लूट आरोपी के पैर में गोली लगने की बात सामने आई थी। घटना के बाद समस्तीपुर एसपी स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सदर अस्पताल में भी भारी पुलिस बल की तैनाती रही।
लेकिन सोशल मीडिया एवं स्थानीय लोगों के बीच वायरल हो रही तस्वीरों में उजियारपुर थानाध्यक्ष सिविल ड्रेस में दिखाई दे रहे हैं। जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि, जब डीजीपी का स्पष्ट आदेश लागू है, तो क्या थानाध्यक्ष पर विभागीय कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
लोगों के बीच चर्चा का विषय बना मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आम पुलिसकर्मियों को वर्दी को लेकर सख्त निर्देश दिए जाते हैं, तो फिर थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी नियमों से ऊपर कैसे हो सकते हैं। कई लोगों ने इसे पुलिस विभाग के भीतर दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया है।
वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि, संभव है कि, थानाध्यक्ष किसी विशेष ऑपरेशन या गोपनीय सूचना के कारण सिविल ड्रेस में रहे हों, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि, यदि ऐसा था तो क्या इसकी अनुमति वरीय पदाधिकारियों से ली गई थी?
विभागीय कार्रवाई पर टिकी है निगाहें
अब लोगों की निगाहें समस्तीपुर पुलिस प्रशासन और पुलिस मुख्यालय पर जा टिकी हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, डीजीपी के आदेश के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए उजियारपुर थानाध्यक्ष पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।








