उजियारपुर/समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड के पतैली पश्चिमी पंचायत में मनरेगा योजनाओं में भारी अनिगमिता का मामला प्रकाश में आया है।

पतैली पश्चिमी पंचायत में एक्टिव मनरेगा माफिया मजदूरों के स्थान पर ट्रैक्टर, जेसीबी व हाईवा से काम कराकर लाखों करोड़ों रूपये डकार ले रहे हैं, जबकि मनरेगा के किसी भी काम में ट्रैक्टर, जेसीबी, हाईवा, पोकलेन आदि का इस्तेमाल नही करना है, लेकिन कार्यस्थल पर मौजूद टायर के सैकड़ों निशान यह चीख चीखकर गवाही दे रहा है कि, पतैली पश्चिमी पंचायत में तालाब निर्माण कार्य में जेसीबी व ट्रैक्टर सहित अन्य मशीनरी का इस्तेमाल धरल्ले से किया जा रहा है।
ऐसा नही है कि, इसकी सुचना संबंधित किसी पदाधिकारी को नही है ? जानकारी सबको है लेकिन हरे हरे पत्ते पर छपे गांधी जी के फोटो वाला दस्तावेज मिलते ही इनकी जांचगिरी हवा हवाई हो जाती है। स्थानीय सुत्रों का बताना है कि, पंचायत में दर्जनों योजनाओं पर अपेक्षित कार्य कराए बिना ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई है।
कहीं कहीं तो ऐसा भी हुआ है कि, सड़क किनारे जिस व्यक्ति का खेत रहता है उससे बातचीत कर कुछ पैसे का प्रलोभन देकर जेसीबी से 500 मीटर 1000 मीटर लंबा गड्ढ़ा खोदकर बाहा उड़ाही का रूप दे दिया जाता है, तथा राशि की निकासी होते ही उस गड्ढ़े को दुबारा फिर से ढ़क दिया जाता है।
अगर मनरेगा पदाधिकारी वित्तीय वर्ष 2024-25 2025-26 व वित्तीय वर्ष 2026-27 के योजनाओं को एक जिम्मेदार पदाधिकारी के रूप में जांच करे तो, आधा दर्जन से ज्यादा मनरेगा माफिया/मनरेगा दलाल जेल के अंदर होंगे, लेकिन जिस प्रकार मनरेगा योजना में लूट मची हुई है, उससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि, बगैर मनरेगा कार्यालय से जुड़े पदाधिकारियों की मिलीभगत से इतने बड़े पैमाने पर मनरेगा में घोटाला करना संभव ही नही है। इस तरह की सभी योजनाओं में सबसे बड़ा लुटेरा पंचायत रोजगार सेवक व कनीय अभियंता होता है। यह सारा खेल इन्ही दोनों के इशारों पर खेला जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि, पंचायत में मनरेगा के तहत स्वीकृत की गयी, कई विकास योजनाओं का भुगतान प्राप्त कर लिया गया है, लेकिन धरातल पर काम बिलकुल शून्य है। जबकि मनरेगा द्वारा संचालित कुछ योजनाओं में, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, फर्जी तरीका अपनाकर सभी प्रविष्टियों को ऑनलाइन करने के बाद, कई योजनाओं में वास्तविक कार्य की तुलना में अधिक प्रगति दर्ज कर दी गई, जिसके आधार पर भुगतान भी जारी कर दिया गया है।
स्थानीय सुत्रों का बताना है कि, पंचायत के विभिन्न वार्डों में संचालित मिट्टीकरण, नाला निर्माण, जल निकासी, पौधारोपण एवं अन्य विकास कार्यों की यदि निष्पक्ष जांच जिला स्तरीय पदाधिकारियों से करायी जाए तो, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। सुत्र का यह भी दावा हे कि, कुछ योजनाओं में कार्यस्थल पर निर्धारित मात्रा में काम नहीं हुआ, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है।
आपको बता दें कि, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी रोजगार योजना का उद्देश्य गरीब और मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना है, लेकिन यदि अनियमितताओं के आरोप सही साबित होते हैं तो, इससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो जाएंगे।







