सरकारी बस पड़ाव के जीर्णोद्धार के नाम पर जीवनदायिनी पीपल समेत उखाड़े गए कई हरे-भरे पेड़

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समस्तीपुर। शहर के सरकारी बस पड़ाव के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान परिसर में वर्षों से खड़े जीवनदायिनी पीपल के हरे-भरे पेड़ सहित, कई अन्य पेड़ों को जेसीबी मशीन की सहायता से उखाड़ दिया गया। हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई दर्जनों नगर निगम कर्मियों की मौजूदगी में की गई है। पेड़ों को उखाड़े जाने के बाद पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस पड़ाव परिसर में मौजूद पीपल का यह वृक्ष बस पड़ाव के जीर्णोद्धार के बाद यात्रियों को छाया प्रदान करता, तथा इस तपती गर्मी के मौसम में सैकड़ों यात्री इस पेड़ की छांव में बस का इंतजार करते, लेकिन अब जीर्णोद्धार के नाम पर उसे जड़ समेत उखाड़ दिया गया है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या बिना अनुमति हरे पेड़ को उखाड़ा जा सकता है?

पर्यावरण एवं वन संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार किसी भी जीवित एवं हरे-भरे वृक्ष को काटने, स्थानांतरित करने अथवा उखाड़ने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति की आवश्यकता होती है। सामान्यतः नगर क्षेत्र में स्थित वृक्षों को हटाने से पहले वन विभाग अथवा संबंधित प्राधिकरण से स्वीकृति प्राप्त करनी पड़ती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई सरकारी एजेंसी विकास कार्य के लिए वृक्ष हटाती है, तो उसे वृक्षों का सर्वेक्षण और सूचीकरण, संबंधित विभाग से अनुमति प्राप्त, पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन, वृक्ष प्रत्यारोपण की संभावना का परीक्षण, क्षतिपूरक वृक्षारोपण की व्यवस्था व हटाए गए प्रत्येक वृक्ष के बदले कई नए पौधे लगाने की योजना पर काम करना पड़ता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि, क्या बस पड़ाव के जीर्णोद्धार से पहले इन सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

आपको बता दें कि, पीपल का पेड़ भारतीय उपमहाद्वीप का अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्ष माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वृक्ष वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है तथा वायु गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही वातावरण में प्रदूषक तत्वों को कम करने में सहायता करता है। तापमान नियंत्रण एवं शहरी गर्मी को कम करने में मददगार साबित होता है। पक्षियों, गिलहरियों एवं अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास का काम करता है, साथ ही यात्रियों एवं राहगीरों को घनी छाया भी प्रदान करता है। भूजल संरक्षण एवं मिट्टी कटाव रोकने में भी सहायक होता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बड़े एवं परिपक्व वृक्षों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक विकसित वृक्ष को तैयार होने में कई दशक लग जाते हैं, जबकि उसे कुछ मिनटों में काटा या उखाड़ा जा सकता है।

विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि बस पड़ाव का जीर्णोद्धार किया जा रहा था तो वृक्षों को बचाने अथवा प्रत्यारोपित करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता था।

फिलहाल बस पड़ाव परिसर से जीवनदायिनी पीपल सहित अन्य वृक्षों के उखाड़े जाने के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा हटाए गए वृक्षों के बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराने की मांग की है।

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