समस्तीपुर/उजियारपुर: उजियारपुर प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत सहित अन्य पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर पूछे जा रहे सवालों पर प्रखंड के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) महेश कुमार के रवैये ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।
प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में हो रही कथित गड़बड़ियों, फर्जी हाजिरी, बिना कार्य के भुगतान, योजनाओं की प्रगति तथा शिकायतों से संबंधित जानकारी मांगने और पक्ष जानने के लिए जब कार्यक्रम पदाधिकारी महेश कुमार से मोबाइल पर संपर्क किया जाता है, तो वह सवालों के जवाब देने के बजाय संबंधित पत्रकारों के मोबाइल नंबर को ही ब्लॉक कर देते हैं।
आपको बता दें कि, जनहित से जुड़े मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों का जवाबदेह होना आवश्यक है। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में उठ रहे सवालों पर अधिकारी का पक्ष जानना पत्रकारिता का हिस्सा है, लेकिन सवाल पूछने वालों के मोबाइल नंबर को ब्लॉक कर देना योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ज्ञात हो कि, उजियारपुर प्रखंड के विभिन्न पंचायतों, विशेषकर लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में मनरेगा योजनाओं को लेकर, लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कई योजनाओं में कार्यस्थल पर काम नहीं होने, फर्जी मजदूरों की हाजिरी बनाने तथा सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन मामलों को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा जांच की मांग भी की जा रही है।
जिसके कारण इस संबंध में कार्यक्रम पदाधिकारी महेश कुमार का पक्ष प्राप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क होने के तुरंत बाद उजियारपुर मनरेगा पीओ महेश कुमार ने “उजियारपुर न्यूज” के पत्रकार श्याम कुमार का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया गया।
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और आम लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उच्चाधिकारियों को हस्तक्षेप करना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि मनरेगा योजनाओं में उठ रहे सवालों और अधिकारियों के कार्यशैली को लेकर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।









