फर्जी हस्ताक्षर और मुहर से फर्जी योजनाओं को उजियारपुर में मिल रही स्वीकृति, मनरेगा कार्यालय पर जल्द शुरू हो सकती है अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल! फर्जी योजनाओं के संचालक बने उजियारपुर पीओ महेश कुमार

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समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पंचायत क्षेत्र में संचालित ज्यादातर योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति कथित रूप से पंचायत समिति सदस्य के फर्जी हस्ताक्षर एवं मुहर के आधार पर दिए जाने का मामला सामने आने के बाद हरकंप मचा हुआ है।

लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में कई योजनाओं का क्रियान्वयन ऐसे प्रशासनिक स्वीकृति पत्रों के आधार पर किया जा रहा है, जिन पर पंचायत समिति सदस्य के हस्ताक्षर और मुहर की सत्यता संदिग्ध है। अगर किसी जनप्रतिनिधि की जानकारी और सहमति के बिना उसके नाम और मुहर का उपयोग कर योजनाओं को स्वीकृति दी गई है, तो यह न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को भी जन्म देता है।

मामले को लेकर पंचायत क्षेत्र के लोगों का कहना है कि फर्जी तरीके से स्वीकृत योजनाओं की जांच होने तक संबंधित कार्यों पर रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग को रोका जा सके।

वहीं सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, फर्जी योजनाओं व फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति की यदि प्रशासन द्वारा जांच कर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो, इस मामले के विरोध में उजियारपुर मनरेगा कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जा सकती है। जिसकी तैयारी शुरू कर दी गयी है। आंदोलन की तैयारी कर रहे लोगों का कहना है कि वहलोग इस मुद्दे को लेकर लगातार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में पंचायत समिति स व सदस्य के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर से दर्जनों फर्जी पोखरा/नाला उड़ाही/बाहा उड़ाही जैसी योजना को भ्रष्टाचारी पीओ उजियारपुर महेश कुमार ने एप्रूव कर दिया है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि फर्जी हस्ताक्षर और मुहर के मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा विवादित योजनाओं की समीक्षा नहीं होने की स्थिति में भूख हड़ताल के साथ-साथ व्यापक जनआंदोलन भी चलाया जाएगा।

हालांकि इस संबंध में मनरेगा विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर सच्चाई को सार्वजनिक किया जाए, ताकि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

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