उजियारपुर (समस्तीपुर)। उजियारपुर प्रखंड के चैता दक्षिणी पंचायत में मनरेगा योजना के तहत संचालित नहर उड़ाही एवं पौधारोपण कार्यों में भारी अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों एवं सूत्रों ने पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य तथा कुछ कथित मनरेगा माफियाओं पर योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर लूट-खसोट करने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय पोर्टल पर जिन योजनाओं को पूर्ण अथवा प्रगति पर दिखाया गया है, उनमें अधिकांश कार्य धरातल पर मानक के अनुरूप नहीं कराए गए हैं। इन योजनाओं में मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन से कार्य कराया गया, जबकि कुछ स्थानों पर केवल एक-दो मजदूर लगाकर नहर की ऊपरी सतह की सफाई कर दी गई, ताकि देखने में कार्य पूर्ण प्रतीत हो सके।
इतना ही नही! योजनाओं की वास्तविक प्रगति दिखाने के बजाय पूर्व से मोबाइल में सुरक्षित तस्वीरों को कार्यस्थल के समीप से जियो टैग कर पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है, तथा कागजों पर कार्य को पूर्ण दिखाकर सरकारी राशि की निकासी कर ली जाती है।
जिन योजनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें वार्ड संख्या 10 में रामेश्वर राय के खेत से मिश्री साहनी के खेत तक नहर उड़ाही कार्य, जिला परिषद पुलिया से उपेंद्र राय के खेत तक नहर उड़ाही कार्य, भरपुरा सीमान से मियां डेरा तक नहर उड़ाही कार्य, बंबइया सीमान से परमेश्वर साहनी के खेत तक नहर उड़ाही कार्य, सुरेश साहनी के खेत से रामाश्रय राय के खेत तक नहर उड़ाही कार्य तथा रामदयाल साहनी के खेत से रामेश्वर राय के खेत तक नहर उड़ाही का कार्य प्रमुख हैं।
इसके अलावा योगेंद्र राय, शिवनारायण पांडेय, शिवजी राय, शक्ति कुमार, रानी देवी, अरुण पांडेय, नंद किशोर पांडेय, गीता देवी, रामजी पांडेय, शांति देवी एवं होरिल राय की निजी भूमि पर संचालित पौधारोपण योजनाओं में भी वृहद पैमाने पर अनियमितता की गयी है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, पंचायत में हजारों पौधे लगाने का दावा किया गया है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश योजनास्थलों पर पौधों का अस्तित्व ही नहीं दिख रहा है। यदि पौधारोपण योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी उजागर हो सकती है।
विश्वसनीय सूत्रों का यह भी बताना है कि, मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों के खातों में मजदूरी राशि भेजने के बाद, कुछ लोगों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र संचालक की मदद से मजदूरों के घर जाकर फिंगरप्रिंट लिया जाता है, तथा मजदूरों को नाममात्र का 200 रूपए देकर शेष रकम की निकासी कर ली जाती है। हालांकि इस आरोप की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
ऐसा नही है कि, इसकी जानकारी उजियारपुर पीओ को नही है! सारे घटनाक्रम की जानकारी रहने के बाद भी वह इन सभी मामलों पर चुप्पी साधे रहता है! क्यों कि समय-सीमा के अंदर उन्हें मनचाहा चढ़ावा जो मिल जाता है।









