धोबियाही पोखर में बनने वाला नया सीढ़ी घाट फिर बना चर्चा का विषय, ग्रामीणों ने जताई गुणवत्ता को लेकर चिंता!

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समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत स्थित धोबियाही पोखर में एक बार फिर सीढ़ी घाट निर्माण कार्य की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग 10 से 15 लाख रुपये की लागत से इस धोबियाही पोखर पर सीढ़ी घाट का निर्माण कराया जाना है। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही इसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि, धोबियाही पोखर में इससे पहले भी तीन सीढ़ी घाटों का निर्माण कराया जा चुका है, लेकिन पूर्व में बने तीनों घाटों के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई थी, जिसके कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए घाट निर्माण को लेकर लोगों के बीच आशंका व्याप्त है कि कहीं यह योजना भी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट न चढ़ जाए।

पूर्व के निर्माण कार्यों पर उठते रहे हैं सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार पहले बने कई सीढ़ी घाटों में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया था। उन निर्माण कार्यों में सामग्री की गुणवत्ता कमजोर थी तथा कार्य में निर्धारित मानकों के अनुरूप मजबूती भी नहीं दी गई। परिणामस्वरूप कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य अपेक्षित अवधि तक टिकाऊ साबित नहीं हो सका। जिसके कारण ग्रामीणों का कहना है कि, यदि पूर्व में हुए निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए तो, कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। इसी कारण नए निर्माण कार्य को लेकर भी लोगों में अविश्वास का माहौल बना हुआ है।

सीढ़ी घाट निर्माण में क्या होते हैं तकनीकी मानक?

जानकारों का बताना है कि, किसी भी पोखर अथवा जलाशय पर सीढ़ी घाट निर्माण के दौरान कई तकनीकी मानकों का पालन आवश्यक होता है। जिसमें प्रमुख रूप से सीढ़ीघाट निर्माण से पहले स्थल का सर्वेक्षण करना एवं मिट्टी की जांच कराना, मजबूत नींव का निर्माण करना, निर्धारित मोटाई के अनुसार कंक्रीट का उपयोग करना, सीमेंट, बालू एवं गिट्टी का मानक अनुपात में उपयोग करना, सीढ़ियों की चौड़ाई एवं ऊंचाई का तकनीकी मापदंडों के अनुसार निर्माण करना, घाट के किनारों पर सुरक्षा एवं कटाव रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित करना, कंक्रीट कार्य के बाद पर्याप्त अवधि तक क्योरिंग (पानी पटवन) का काम करना आदि शामिल है। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाती है तो कुछ वर्षों के भीतर ही सीढ़ियां टूटने लगती हैं, किनारों पर दरारें आ जाती हैं और पूरी संरचना कमजोर पड़ जाती है।

कमीशनखोरी की चर्चा से बढ़ी चिंता

पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से विकास योजनाओं में कमीशनखोरी की चर्चा होती रही है। इसी बीच सुत्रों का बताना है कि, यदि योजना राशि का बड़ा हिस्सा विभिन्न स्तरों पर कमीशन में चला जाता है तो, निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। जिसके कारण ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में हुए कार्यों की स्थिति देखकर उनलोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है।

जनता की नजर निर्माण कार्य पर

धोबियाही पोखर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि, वहलोग निर्माण कार्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनलोगों का कहना है कि, यदि शुरुआत से ही कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए, और निर्माण कार्य की निष्पक्ष निगरानी हो, तो यह योजना पंचायत के लिए एक उपयोगी संपत्ति साबित हो सकती है। वहीं यदि पूर्व की तरह अनियमितता बरती गई तो यह योजना भी सरकारी धन की बर्बादी का एक और उदाहरण बन सकती है।

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