समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि एक ही पंचवर्षीय अवधि के भीतर पहले से पूर्ण हो चुके बाहा उड़ाही कार्य को दोबारा नए नाम से स्वीकृत कर सरकारी राशि की निकासी की तैयारी की जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग और जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की मिलीभगत का उदाहरण बताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित स्थल पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में तत्कालीन योजना के तहत बाहा उड़ाही का कार्य कराया गया था। उक्त योजना को स्थानीय मुखिया बेनजीर बानो की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त थी तथा योजना के तहत कार्य पूर्ण होने का दावा भी किया गया था। इसके बावजूद अब उसी स्थान पर पंचायत समिति सदस्य की प्रशासनिक स्वीकृति से योजना का नाम बदलकर पुनः बाहा उड़ाही का कार्य कराया जा रहा है। जबकि दिनेश राय के घर के पास से बाहा उड़ाही के नाम पर एक टोकरी मिट्टी तक नही काटा गया है, जंगल साफ करना और लेबल देखना तो दुर की बात है। जबकि बगैर काम किए ही रोजाना 100 मजदूरों की हाजिरी/उपस्थिति दर्ज की जाती है।
जिस स्थान पर पहले ही सरकारी राशि खर्च कर उड़ाही कार्य कराया जा चुका है, वहां दोबारा बाहा उड़ाही का कार्य कराना कहां तक उचित है। यदि पुराने कार्य की स्थिति खराब थी तो उसकी तकनीकी जांच कर मरम्मत या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया क्यों नही अपनाई गयी ?
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में उजियारपुर प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) महेश कुमार, कनीय अभियंता सचिन कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक शिकायत भी की गई है। शिकायत में पुराने और नए कार्यस्थल की समानता, योजना की प्रकृति तथा सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग की जांच की मांग की गई है।
लेकिन शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है। इससे लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि, जनप्रतिनिधियों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से योजनाओं के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।









