अरविन्द कुमार:(उजियारपुर) जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत रामजानकी हनुमान मंदिर परिसर में, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय समस्तीपुर के द्वारा आयोजित सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन शिविर के पांचवें दिन भी शिविर में श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।

आयोजित इस शिविर में वर्तमान समय में राजयोग अभ्यास की महत्ता के बारे में प्रकाश डालते हुए सोनिका बहन ने कहा कि, राजयोग सभी योगों का राजा है। इसमें सभी प्रकार के योगों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक फायदे निहित हैं।

चिकित्सा विज्ञान भी यह मानता है कि आज जितनी भी बीमारियां हैं, उसमें 90% बीमारियों का कारण हमारे मन के नकारात्मक और दूषित विचार हैं। राजयोग के नियमित अभ्यास से हमारे विचारों का शुद्धिकरण और सशक्तिकरण होता है।
जिससे हम इन 90% बीमारियों पर सहज विजय प्राप्त कर सकते हैं। राजयोग अभ्यास से हमारी सहनशक्ति में असीम वृद्धि होती है। जिससे शरीर में तकलीफ होने के बाद भी दर्द का एहसास नही होता है।
राजयोग के अभ्यास से हमारा इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप हमारी जीवनशैली, खान-पान और दिनचर्या संयमित, संतुलित और अनुशासित होती जाती है। यह बीमारियों से लड़ने में रक्षा कवच का काम करता है।
नियमित राजयोग का अभ्यास हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। मानसिक स्वास्थ्य के रूप में इसके अभ्यासी अनिद्रा, चिंता, तनाव, अवसाद, भय आदि अनेक मानसिक विकारों पर विजय प्राप्त करते हैं।
इससे उनकी खुशी, शांति, निश्चिंतता, हल्कापन, कार्यक्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। सामाजिक स्वास्थ्य के रूप में आपसी सहयोग, सम्मान, समरसता, एकता आदि गुण स्वत: आने लगते हैं। आध्यात्मिक स्वास्थ्य, जो सभी स्वास्थ्य का जनक है और जिसे प्राय: अनदेखा किया जा रहा है।
राजयोग का नियमित अभ्यास इसमें भी चार चांद लगाता है। हमारे आंतरिक गुणों और शक्तियों में निरंतर वृद्धि होने लगती है। उन्होंने सभी उपस्थित श्रोताओं से इसका नियमित अभ्यास करने का आह्वान किया। सभी को इसके अभ्यास की विधि बता कर इसका अभ्यास कराया गया।







