???? बिग ब्रेकिंग- लापरवाही: Emergency वार्ड में ईलाजरत दर्जनों मरीजों के बीच घंटों बेड पर पड़ा रहा महिला का शव! बेखबर रहा सदर अस्पताल प्रशासन! दोषी कौन ?

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समस्तीपुर। जिला मुख्यालय का एकमात्र सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल समस्तीपुर अपने किसी ना किसी कारनामों को लेकर हमेशा चर्चा में बना ही रहता है। कभी ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी से होने वाली मौत को लेकर, तो कभी ईलाज में डॉक्टर व अन्य कर्मियों की लापरवाही को लेकर। यही नही! दो दिन पहले ही एंबुलेंस चालक के वेतन निर्धारण के नाम पर इस सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक की निगरानी टीम के हाथों हुई गिरफ्तारी ने तो पुरे प्रदेश में भूचाल सा ला दिया था।

इन घटनाओं के अभी ठीक से 96 घंटे भी पुरे नही हुए थे, कि एक और मामले में सदर अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और अन्य कर्मियों की कलई खोल कर रख दी है। प्राप्त सूचनानुसार उजियारपुर थाना क्षेत्र के मालती गाँव की रहने वाली एक महिला की सदर अस्पताल में ईलाज के दौरान मौत होने के घंटों बाद तक, उक्त मृत महिला का शव सदर अस्पताल के आपातकालीन विभाग (Emergency Ward) में घंटों पड़ा रहा, और उस शव के आसपास दुसरे मरीजों का ईलाज भी किया जाता रहा, लेकिन किसी ने उक्त शव को उस आपातकालीन विभाग के उस वार्ड से हटाने की जहमत तक नही उठायी।

जबकि बिहार सरकार के द्वारा निर्मित सभी सरकारी अस्पतालों में शव गृह का निर्माण अलग से कराया जाता है, ताकि किसी भी परिस्थिति में शव को ईलाजरत मरीजों के साथ ना रखा जाए। हालांकि इस दौरान मिडिया के लोगों द्वारा चादर से ढ़के शव की तस्वीर लेने के समय में, ईलाजरत मरीजों को कुछ शंका जरूर हो रही थी, लेकिन कोई कुछ बोल नही पा रहा था।

यही नही उक्त महिला के शव से सटे बेड पर ही करीब 70 वर्षिय एक बुजुर्ग व्यक्ति भी अपना ईलाज करवा रहे थे, लेकिन वह भी शायद इस मामले से अंजान थे। दरअसल मामला यह था कि, बुधवार 21 मई को उजियारपुर थाना क्षेत्र के मालती गाँव निवासी एक महिला ने विषपान कर ली थी। जिसके बाद उसे बेहोशी के हालत में, सदर अस्पताल समस्तीपुर आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। जहां ईलाज के दौरान उक्त महिला की रात्रि करीब 8 बजे में मौत हो गयी थी।

जिसके बाद बुधवार 21 मई की रात्री करीब 8 बजे से लेकर गुरूवार की सुबह करीब 11 बजे तक उक्त महिला का शव ईमरजेंसी वार्ड के बेड पर रखा रहा, साथ ही उक्त शव के चारों ओर अन्य मरीज का ईलाज किया जाता रहा। जबकि यह नियमसंगत नही है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए था कि, उक्त मृत महिला के शव को किसी उचित स्थान पर सुरक्षित रखा जाता, अथवा उक्त महिला के शव को अस्पताल में निर्मित शवगृह में रखा जाता।

जानकारों का बताना है कि, इस तरह सदर अस्पताल में ईलाजरत सामान्य मरीजों के साथ किसी शव को रखा जाना सर्वथा अनुचित है। इस तरह सामान्य मरीजों के साथ शव रखने से, शव को देखकर ईलाजरत मरीजों व उनके परिवार वालों को मानसिक तनाव व पीड़ा हो सकती है, जो ईलाजरत मरीजों के स्वास्थ्य के लिये काफी हानिकारक है। मृतक के शव को सामान्य मरीजों के साथ रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

कभी कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि, अपने आसपास शव को देखकर ईलाजरत मरीजों को अपनी भी मौत का भय सताने लगती है। वहीं इस मामले से संबंधित सदर अस्पताल समस्तीपुर के डीएस गिरीश कुमार व जिलाधिकारी समस्तीपुर के सरकारी मोबाइल नंबर से संचालित Whatsapp पर मैसेज डालकर जानकारी जुटाने की कोशिश की गयी तो, मैसेज READ करने के बाद भी उन्होंने कोई जबाब नही दिया। जिससे प्रथम दृष्टांत ऐसा प्रतीत होता है कि, वहलोग भी इस मामले से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।

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