समस्तीपुर। जिला के विभिन्न थाना क्षेत्रों में बढ़ते अपराध और लगातार हो रही लूट, हत्या, चोरी एवं छिनतई की घटनाओं के बीच, जिले के लोग एक बार फिर पूर्व पुलिस अधीक्षक आईपीएस अधिकारी अशोक मिश्रा के कार्यकाल को याद कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा इस बात की हो रही है कि, आखिर एक समय ऐसा भी था, जब अपराधी पुलिस के नाम से ही खौफ खाते थे और बड़ी से बड़ी वारदात का खुलासा कुछ ही दिनों में कर लिया जाता था।

लोगों का कहना है कि “जब नीयत साफ हो तो नियति भी साथ देती है”, और यह बात तत्कालीन एसपी अशोक मिश्रा के कार्यकाल पर पूरी तरह लागू होती है। उनका काम करने का तरीका बिल्कुल ही अलग था। जिले में अपराध की घटनाएं तो उस समय भी होती थीं, लेकिन अपराधियों को पकड़ने की गति और पुलिस की सक्रियता लोगों के बीच विश्वास भी पैदा करती थी।
करोड़ों की ज्वेलरी लूट का हुआ था त्वरित खुलासा
जिले के चर्चित ज्वेलरी हाउस लूटकांड को आज भी लोग याद करते हैं। उस घटना में हथियारबंद अपराधियों ने जिला मुख्यालय स्थित एक ज्वेलरी दुकान व एक बैंक से करोड़ों रुपये मूल्य के जेवरात और नकदी लूट ली थी। घटना के बाद अपराधियों ने कोई स्पष्ट सुराग तक नहीं छोड़ा था। बावजूद इसके तत्कालीन एसपी अशोक मिश्रा ने इस मामले को चुनौती के रूप में लिया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के उद्भेदन के लिए वह स्वयं कई रातों तक जागकर समस्तीपुर, वैशाली और मुजफ्फरपुर जिले के, हजारों सीसीटीवी फुटेज खंगालते रहे। तकनीकी अनुसंधान और लगातार मॉनिटरिंग के बाद पुलिस ने इस लूटकांड में शामिल अधिकांश अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बताया जाता है कि उसी दौरान बनाई गई रणनीति के आधार पर बाद के वर्षों में भी कुछ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी है।
अपराधियों के साथ-साथ भूमाफियाओं में भी था भय
अशोक मिश्रा के कार्यकाल की चर्चा केवल अपराध नियंत्रण तक ही सीमित नहीं है। जिले में सक्रिय भूमाफिया, दबंग तत्व और अवैध कारोबार से जुड़े लोग भी उस समय पुलिस कार्रवाई के भय से सतर्क रहते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस दौर में कई भूमाफिया अपने-अपने “बिलों में दुबक” गए थे और खुलेआम दबंगई करने से बचते थे।
पुलिस विभाग के अंदर भी उनकी छवि एक अनुशासित और ईमानदार अधिकारी की रही। काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी वह सख्त कार्रवाई करते थे। हालांकि, कुछ लोग यह भी बताते हैं कि उनकी सख्ती और निष्पक्ष कार्यशैली के कारण, बाद में राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ पुलिस अधिकारियों व एक जनप्रतिनिधी की नाराजगी के शिकार भी हो गए।
कार्यकाल में सीमित रहीं बड़ी घटनाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके कार्यकाल में जिले में बड़ी आपराधिक घटनाएं अपेक्षाकृत कम हुईं। उस दौरान भू-माफियाओं ने एकमात्र घटना, कल्याणपुर थाना क्षेत्र में ई-रिक्शा चालक गणेशी सहनी समेत दो लोगों की गोली मारकर हत्या की घटना को अंजाम दिया था। उस मामले में भी उन्होंने घटना के साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि इस घटना के सफल उद्भेदन से पुर्व ही भू-माफियाओं ने अपनी राजनितिक रसुख का इस्तेमाल कर उनका स्थानांतरण करा दिया था।
वर्तमान हालात पर उठ रहे सवाल
वहीं वर्तमान समय में जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर समस्तीपुर से जुड़ी खबरों की शुरुआत अक्सर लूट, हत्या, डकैती, चोरी और छिनतई जैसी घटनाओं से होती है।
स्थानीय जिलावासियों का कहना है कि, जिले में लगभग रोजाना आपराधिक घटनाएं हो रही हैं, लेकिन किसी भी मामलों में पुलिस की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती है। हालांकि लोग यह भी मानते हैं कि, जिला आसूचना इकाई (DIU) की टीम कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिसके कारण कुछ घटनाओं का खुलासा संभव हो पा रहा है।
जनता को फिर चाहिए सख्त और सक्रिय पुलिसिंग
जिले के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों का कहना है कि समस्तीपुर को फिर उसी तरह की सख्त, जवाबदेह और परिणाम देने वाली पुलिसिंग की जरूरत है, जैसी कभी आईपीएस अशोक मिश्रा के कार्यकाल में देखने को मिली थी। लोगों का मानना है कि यदि पुलिस प्रशासन पूरी ईमानदारी और इच्छाशक्ति के साथ काम करे, तो अपराध पर नियंत्रण आज भी संभव है।







