थानाध्य उजियारपुर के द्वारा सुमन कुमार दास के शव की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने के दौरान थानाध्यक्ष को सिविल ड्रेस में समहयोग कर रही महिला कर्मी कौन थी ?

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उजियारपुर/समस्तीपुर। उजियारपुर थाना क्षेत्र के गावपुर छतवारी गांव में, युवक सुमन कुमार दास की संदिग्ध मौत के मामले में अब एक नया विवाद सामने आया है। घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, अब घटनास्थल पर सिविल ड्रेस में मौजूद एक महिला कर्मी द्वारा मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने में थानाध्यक्ष उजियारपुर की मदद किए जाने से संबंधित एक विडियो सामने आया है।

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि, आखिर घटनास्थल पर मौजूद उक्त महिला कर्मी कौन थीं, और किस हैसियत से वह पुलिस कार्रवाई का हिस्सा बनी हुई थीं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि संबंधित महिला उजियारपुर थाना में पदस्थापित 2022 बैच की प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षक (ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर) नूतन कुमारी हैं, जो थानाध्यक्ष की मौजूदगी में घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई कर रही थीं।

इस मामले में लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि, यदि संबंधित महिला प्रशिक्षु पुलिस पदाधिकारी थीं, तो वह पुलिस वर्दी के बजाय सिविल ड्रेस में क्यों थीं ? ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं चल पा रहा था कि, वह पुलिस विभाग से जुड़ी हुई हैं।

घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि, पुलिस पदाधिकारियों की पहचान आम जनता के लिए स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि, यदि प्रशिक्षण अवधि में ही वर्दी का उपयोग नहीं किया जा रहा है तो, भविष्य में नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित होगा।

आपको बता दें कि, पुलिस विभाग में सामान्य रूप से ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनना अनिवार्य माना जाता है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे गुप्त जांच, खुफिया कार्रवाई, विशेष आदेश अथवा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिसकर्मी सादे लिबास में भी कार्य कर सकते हैं। प्रशिक्षु पुलिस पदाधिकारियों के संबंध में भी विभागीय प्रशिक्षण नियमावली एवं वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार वर्दी अथवा निर्धारित ड्रेस कोड का पालन किया जाता है।

इस संबंध में कानून के जानकारों का बताना है कि, केवल सिविल ड्रेस में मौजूद होना अपने आप में कोई अनुशासनिक कार्रवाई का आधार नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि, संबंधित कर्मी ने विभागीय नियमों या वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन किया है। ऐसे मामलों में जांच और विभागीय स्पष्टीकरण के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई का निर्णय लिया जाता है। हालांकि यह उजियारपुर थाना में पदस्थापित पुलिसकर्मियों के सिविल ड्रेस में घटनास्थल पर जाने का यह कोई पहला मामला नही है। इससे पहले भी उजियारपुर थाना के थानाध्यक्ष अजीत कुमार भी बीते माह भगवानपुर देसुआ गांव में हुई कथित एनकाउंटर के दौरान पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर अरविन्द प्रताप सिंह के सामने भी सिविल ड्रेस में मौजूद थे। हालांकि उस मामले में भी थानाध्यक्ष के खिलाफ किसी प्रकार की कोई विभागीय कार्रवाई नही हुई थी, और जिला पुलिसिंग का जो रवैया है, उसके अनुसार इस मामले में भी कोई कार्रवाई नही होगी।

उल्लेखनीय है कि, सुमन कुमार दास का शव बेलारी-गावपुर मार्ग स्थित एक परवल खेत से बरामद हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस के कथित रूप से देर से पहुंचने को लेकर पहले ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया था। इसके बाद लोगों ने बेलारी हाईस्कूल चौक के पास मुख्य सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया था।

फिलहाल सुमन की मौत के कारणों की जांच जारी है। वहीं घटनास्थल पर हुई पुलिस कार्रवाई और सिविल ड्रेस में मौजूद महिला कर्मी को लेकर उठ रहे सवालों पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है तो,  स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

रेलवे ट्रैक किनारे घंटों पड़ी रही अज्ञात महिला की लाश! घटनास्थल से 1 किलोमीटर दुर एक निजि व्यक्ति के दरवाजे पर आराम फरमाती रही पुलिस। विस्तृत खबर कुछ देर बाद।

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