
पटना। 7.5 CGPA की अनिवार्यता और नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विरोध में बुधवार 01 जुलाई को, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स’ एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में गांधी मैदान से राजभवन तक छात्र मार्च निकाला गया। मार्च में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, जेपी विश्वविद्यालय समेत विभिन्न शिक्षण संस्थानों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
आइसा के अनुसार, शांतिपूर्ण मार्च जब राजभवन की ओर बढ़ रहा था, तभी पुलिस ने उसे रोक दिया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। संगठन का आरोप है कि इस दौरान कई छात्र घायल हो गए। छात्र आशीष के सिर और कान में गंभीर चोट आई, जबकि छात्र नेता नीतीश के हाथ में चोट लगी। कई अन्य छात्रों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया।
आइसा ने दावा किया कि लाठीचार्ज के बाद छात्र सड़क पर शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संगठन के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, नीतीश, दीपक कुमार यदुवंशी, विवेक, विकास सहित कुल 9 लोगों को हिरासत में ले लिया। इनमें दो अन्य छात्र ऋषु और अमर यादव भी शामिल बताए गए हैं।
घटना के बाद आइसा ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास बताया। संगठन ने सभी हिरासत में लिए गए छात्रों की बिना शर्त रिहाई, लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, घायल छात्रों के समुचित इलाज, 7.5 CGPA की अनिवार्यता समाप्त करने तथा नई शिक्षा नीति 2020 के कथित छात्र-विरोधी प्रावधानों को वापस लेने की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस का पक्ष आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।








