
समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड मुख्यालय को नेशनल हाईवे-122 से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क पर, सातनपुर चौक के समीप जलजमाव की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। सातनपुर-उजियारपुर मुख्य मार्ग पर लगभग 500 मीटर की दूरी तक, 8 से 10 इंच वर्षा का पानी कई दिनों तक जमा रहता है। इससे राहगीरों, स्थानीय ग्रामीणों, छात्रों और व्यवसायियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय व्यवसायी मोहम्मद सितारे अहमद का कहना है कि, यह सड़क उजियारपुर प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं। जलजमाव के कारण वाहन चालकों को दुर्घटना का भय बना रहता है, जबकि पैदल चलने वालों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से प्रतिदिन उजियारपुर के अंचलाधिकारी (सीओ), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), थानाध्यक्ष सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन गुजरते हैं। इतना ही नहीं, क्षेत्र के विधायक और सांसद भी क्षेत्र भ्रमण व किसी अन्य काम के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं, लेकिन वर्षों से बनी इस समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
जलजमाव का सबसे अधिक असर सड़क किनारे स्थित करीब 50 से अधिक व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ा है। दुकानदारों का कहना है कि दुकान के सामने हमेशा पानी भरा रहने के कारण ग्राहक आने से कतराते हैं। परिणामस्वरूप उनकी बिक्री बुरी तरह प्रभावित हो रही है, और कई दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो कई छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
स्थानीय व्यवसायी भोला महतो ने बताया कि, बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। सड़क पर बने गड्ढे पानी में छिप जाते हैं, जिससे आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो जाते हैं। कई बार लोगों ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की, लेकिन अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों, दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि, सातनपुर चौक के पास स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कर सड़क की मरम्मत कराई जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और स्थानीय व्यापार भी सामान्य हो सके। वहीं इस संबंध में प्रशासनिक पक्ष के लिए जब प्रखंड विकास पदाधिकारी उजियारपुर संजीव कुमार के मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि, पहले यह देखना पड़ेगा कि, वह रोड किस विभाग से बना हुआ है, इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। प्रखंड कार्यालय के द्वारा इस मामले में कुछ भी नही किया जा सकता है।







