शांति समिति की बैठक के नाम पर खानापूर्ति, जन-प्रतिनिधियों का इस बैठक में मौजूदगी रही नगण्य

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उजियारपुर। श्रावण मास की अंतिम सोमवारी को लेकर गाँवपुर योगी चौक पर आयोजित शांति समिति की बैठक महज एक औपचारिकता दिखी। शांति-समिति के बैठक के नाम पर, यह बैठक महज खानापूर्ति दिख रही है। खानापूर्ति इसलिए, क्यों कि इस बैठक में करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोग ही कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं।

आपको बता दें कि, कांवड़ यात्रा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को लेकर आयोजित, शांति समिति की बैठक में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों की भागीदारी अपेक्षित थी। लेकिन बैठक में अपेक्षाकृत कम संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे। बैठक में संख्या पूरी दिखाने के लिए पत्रकारों को भी शांति समिति के सदस्यों की तरह बैठाया गया है।

जिससे बैठक की गंभीरता और औपचारिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होने लाजिमी है। आपको बता दें कि, बैठक में सड़क की मरम्मती, रौशनी की व्यवस्था, चिकित्सक एवं एंबुलेंस की उपलब्धता, दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती तथा कांवड़ यात्रा के दौरान भारी वाहनों के परिचालन पर रोक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

हालांकि, उपरोक्त जितने भी मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया है, उसमें से रौशनी की व्यवस्था को छोड़ दिया जाए तो,  सभी मुद्दे कागजों पर ही सिमित रह जाएंगे। उनकी यह तैयारी जमीनी स्तर पर कहीं भी दिखाई नही देगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा को लेकर होने वाली बैठकें, सिर्फ कागजी बैठक तक सीमित न रहकर सड़क, बिजली, यातायात, चिकित्सा एवं सुरक्षा व्यवस्था को धरातल पर दुरुस्त किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिनअब सवाल यह है कि यदि शांति समिति की बैठक में ही पर्याप्त जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल नहीं हुए, तो क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और सुझावो की जानकारी कैसे आदान-प्रदान की जाएगी।

आपको बता दें कि, ठीक इसी तरह की खानापूर्ति वाली बैठक आज से करीब 10-12 साल पुर्व भी आयोजित किया गया था, जिसका नतीजा हुआ था कि, गावपुर योगी चौक रात 10 बजे के बाद रणक्षेत्र में तब्दील हो गया था। उसी खानापूर्ति वाली बैठक को एक बार फिर पुलिस/पदाधिकारियों ने दुहरा दिया है।

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