
उजियारपुर/समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड की लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत के वार्ड संख्या-1 में मनरेगा के तहत कराई गई कथित 3.21 लाख रुपये की ‘वाहा उड़ाही’ योजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। योजना में कथित अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग की शिकायत के बाद हुई उच्चस्तरीय जांच अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा का कहना है कि, जांच टीम ने उनसे तथ्यात्मक जानकारी लेने के बजाय प्रखंड के मनरेगा कर्मियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बातचीत के आधार पर जांच किया, जिससे इस पूरी जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है।
शिकायतकर्ता से नहीं, मनरेगा कर्मियों से बातचीत
शिकायतकर्ता के अनुसार योजना में फर्जी हाजिरी, मजदूरों के नाम पर भुगतान और वास्तविक कार्य से अधिक कार्य दिखाया गया है। ऐसे में जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह होना चाहिए था कि मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों से सीधे पूछताछ की जाए कि उन्होंने वास्तव में योजना में काम किया था या नहीं। शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने जांच टीम पर यह भी आरोप लगाया कि, जांच टीम के द्वारा उन्हें पर्याप्त अवसर देने के बजाय जांच टीम ने प्रखंड के मनरेगा कर्मियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर उसी के अनुरूप योजना का जांच किया है। शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने यह भी कहा कि, यदि शिकायत ही गलत थी तो जांच टीम को शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करने में क्या परेशानी थी?
मस्टर रोल में सैकड़ों मजदूर, लेकिन मौके पर कौन-कौन पहुंचा?
जांच के दौरान मजदूरों की मौजूदगी को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मस्टर रोल में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति दर्ज है, लेकिन जांच के समय उन सैकड़ों मजदूरों में से अधिकांश मौके पर दिखाई नहीं दिए। असली मजदुरों की जगह योजना की अनुशंसा करने वाली पंचायत समिति सदस्य सोनी कुमारी के पति अखिलेश कुमार, योजना की मेट पूनम कुमारी के पति मिथिलेश कुमार तथा मेट पूनम कुमारी के देवर रामनरेश सहनी को मनरेगा मजदूर के रूप में मौके पर उपस्थित किया गया। यही बात अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आ रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि, अगर मस्टर रोल में सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, तो जांच के समय कम से कम 50 प्रतिशत मजदूरों को भी मौके पर क्यों नहीं बुलाया गया? जिन मजदूरों के नाम पर मजदूरी का भुगतान हुआ, उनके बयान क्यों नहीं लिए गए?
क्या वास्तविक मजदूरों से पूछताछ होती तो खुल जाता फर्जीवाड़ा?
शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा का यह भी कहना है कि, यदि मस्टर रोल में दर्ज वास्तविक मजदूरों को मौके पर बुलाकर एक-एक कर मदजुरों से यह सवाल किया जाता कि, उन्होंने कब, कहां और कितने दिनों तक काम किया, तो योजना में हुई फर्जी हाजिरी की सच्चाई सामने आ सकती थी। इसलिए जांच पदाधिकारियों ने जांच के दौरान एक सोची समझी साजिश के तहत कुछ चुनिंदा कथित और फर्जी मजदुरों से ही इस योजना से संबंधित जानकारी लिया।
जांच स्थल पर कथित भीड़ और शिकायतकर्ता व पत्रकारों को धमकी
जांच स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों व शराब के नशे में धुत्त लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत के पुर्व मुखिया व वर्तमान मुखिया पति रिजवी उर्फ भाईजान के द्वारा आखिर अज्ञात गुंडों व अपने समर्थकों को क्यों बुलाया गया था। अगर योजना सही ढंग से चलाया गया था तो, 3 लोगों की आवाज दबाने के लिए आखिर 300 लोगों की फौज क्यों खड़ी की गयी थी ? वीडियो बनाने वाले पत्रकारों को पुर्व मुखिया रिजवी उर्फ भाईजान के द्वारा जिंदा वापस नही जाने देंगे कि, धमकी क्यों दी जा रही थी ? अगर योजना से संबंधित शिकायत पूरी तरह गलत थी, तो जांच स्थल पर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को लेकर पहुंचने की आवश्यकता पुर्व मुखिया रिजवी उर्फ भाईजान को क्यों पड़ी ? इससे स्पष्ट होता है कि इस भीड़ और भाड़े के गुंडों को जुटाकर पुर्व मुखिया रिजवी उर्फ भाईजान शिकायतकर्ता व उनके सहयोगियों पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि जांच की प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।
‘मनरेगा माफिया’ पर आवाज दबाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि, योजना से संबंधित पूरी जांच प्रक्रिया से ऐसा प्रतीत होता है कि, स्थानीय स्तर पर सक्रिय कथित ‘मनरेगा माफिया’ शिकायतकर्ता की आवाज को दबाना चाहता था। शिकायतकर्ता का कहना है कि, यदि योजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है तो, निष्पक्ष जांच में सभी मस्टर रोल मजदूरों को बुलाकर उनके बयान लेने, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति की जांच करने और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का मिलान करने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी, साथ ही जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि, मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों ने वास्तव में काम किया था या नहीं ? उनके खातों में भुगतान किस आधार पर हुआ ? और योजना स्थल पर जितना कार्य दिखाया गया है, उतना कार्य वास्तव में हुआ भी था या नहीं ?
मामला अभी खत्म नहीं, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। जांच के दौरान सामने आई विसंगतियों, मौके के वीडियो, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा रहा है। बहुत जल्द पूरे मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष दोबारा रखा जाएगा, और जरूरत पड़ने पर पटना हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा, तथा न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से योजना की पूरी प्रक्रिया, मस्टर रोल, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, भुगतान और अधिकारियों-कर्मियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 3.21 लाख रुपये की इस योजना में वास्तव में कितना काम हुआ ? मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों ने काम किया था या नहीं ? और जांच के दौरान सभी वास्तविक लाभार्थी मजदूरों से पूछताछ क्यों नहीं की गई?
जिस योजना की जांच 5 सदस्यीय टीम द्वारा किया जा रहा था, उसकी मापी पुर्व मुखिया रिजवी उर्फ भाईजान के दलाल सह आपराधिक मामले में जेल जा चुके बदमाश युवक मोहम्मद सद्दाम के द्वारा क्यों कराया जा रहा था ? कहीं ऐसा तो नही है कि शिकायतकर्ता को भयभीत करने की यह भी पुर्व मुखिया की एक सोची समझी साजिश थी ?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी, मनरेगा कर्मी और योजना से जुड़े जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है।






