
समस्तीपुर। दलसिंहसराय अनुमंडल क्षेत्र में अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता नजर आ रहा है। सोमवार, 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे के बीच महज 12 घंटों के अंदर अंगारघाट, दलसिंहसराय और उजियारपुर थाना क्षेत्रों में गोलीबारी की हुई तीन घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।इन घटनाओं में एक प्रधान शिक्षक बाल-बाल बच गए, जबकि एक स्वर्ण कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। तीसरी घटना में एक पुर्व विधायक प्रत्याशी बाल बाल बच गए। लगातार हुई इन वारदातों ने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षक पर फायरिंग से लेकर कारोबारी की हत्या तक
पहली घटना अंगारघाट थाना क्षेत्र के चैता गांव की है। जहां विद्यालय जाने के लिए घर से निकले प्रधान शिक्षक अमरेंद्र कुमार पांडेय पर बाइक सवार बदमाशों ने गोलीबारी की। हालांकि, शिक्षक बाल-बाल बच गए।
दूसरी घटना दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के पगड़ा गांव में हुई। यहां दुकान बंद कर अपने नवनिर्मित मकान की ओर जा रहे स्वर्ण कारोबारी राजेश की बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने पोस्टमार्टम के बाद शव लौटने पर एनएच-122 जाम कर दिया।
तीसरी घटना उजियारपुर थाना क्षेत्र के लोहागीर गांव स्थित काली स्थान के पास की है। जहां पुर्व विधायक प्रत्याशी राजा साहनी नामक युवक ने, आरोप लगाया कि बदमाशों ने उस पर गोली चलाई, लेकिन गोली बगल से निकल गई। दूसरी गोली चलाने के दौरान पिस्तौल में गोली फंस जाने से उसकी जान बच गई।
पुलिस के बयान और पीड़ित के दावे में अंतर
लोहागीर की घटना को लेकर उजियारपुर थानाध्यक्ष शिव कुमार यादव ने गोली नहीं चलने की बात कही है, और घटनास्थल का निरीक्षण करने का दावा भी किया। वहीं पीड़ित का कहना है कि, थानाध्यक्ष ने घटनास्थल का निरीक्षण नही किया है।
पुलिस के सामने तीन मामलों के उद्भेदन की चुनौती
महज 12 घंटे में तीन थाना क्षेत्रों में हुई इन घटनाओं ने दलसिंहसराय के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और संबंधित थानाध्यक्षों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, पुलिस अपराधियों की पहचान कर कितनी जल्दी इन मामलों का खुलासा करती है।
अब सवाल है कि क्या दलसिंहसराय पुलिस अगले 48 घंटे में इन तीनों मामलों की गुत्थी सुलझा पाएगी? क्षेत्र के लोगों को आश्वासन नहीं, बल्कि अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था में सुधार के रूप में ठोस कार्रवाई का इंतजार है।







