कमला ईमरजेंसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर लगे आरोप को डॉ राजेश कुमार ने बताया झूठा! कहा पटना के किसी निजि अस्पताल में संदेहास्पद स्थिति में मरीज की हुई थी मौत! क्या मरीज के परिजनों की GOOGLE ज्ञान ने ले ली मरीज की जान ?

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बिहार की आवाज। संवाददाता। जिला मुख्यालय से सटे मोहनपुर में संचालित जिला के सबसे चर्चित अस्पताल “कमला ईमरजेंसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” में पिछले दिनों गुरुवार 08 जनवरी को दलसिंहसराय निवासी महिला मरीज चंद्रमुखी कुमारी के परिजनों द्वारा बेवजह किए गए हंगामा के बारे में जानकारी देने के लिए, “कमला ईमरजेंसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजेश कुमार झा ने अस्पताल के ही कॉन्फ्रेंस हॉल में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

आयोजित इस प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि, विगत कुछ दिनों से जिला के विभिन्न सोशल मिडिया/पोर्टल व कुछ अखबारों में उनके अस्पताल से संबंधित खबरें प्रकाशित की जा रही है, वह खबर पुरी तरह सत्य नही है। क्योंकि उन खबरों में केवल मरीज के परिजनों से की गयी पुछताछ के आधार पर मिली जानकारी को ही दर्शाया गया है। उन खबरों में अस्पताल प्रशासन के पक्ष को स्थान नही दिया गया है।

जिसके कारण जिलावासियों के पास उनके अस्पताल से संबंधित भ्रामक जानकारी पहुंच रही। इसलिए उन्होंने आज के इस प्रेस वार्ता का आयोजन किया है, ताकि लोगों को इस घटना के बारे में पुरी जानकारी दी जा सके। घटना की पुरी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि, जिले के दलसिंहसराय की रहने वाली मरीज चंद्रमुखी कुमारी को, मोहनपुर रोड स्थित उनके अस्पताल “कमला ईमरजेंसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” में जले हुए अवस्था में भर्ती कराया गया था।

जिस महिला मरीज को उनके अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वह पूर्व से ही डायबिटीज नामक बिमारी से ग्रसित थीं। उक्त महिला मरीज को “भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ” के जिलाध्यक्ष डॉ० यू॰ एस॰ झा के द्वारा कहे जाने पर, तत्काल बगैर किसी राशि भुगतान के मुफ्त में अस्पताल में भर्ती कर ईलाज शुरू कर दिया गया था। इसी बीच मरीज चंद्रमुखी कुमारी के पुत्र किशोर कुमार, आईसीयू में भर्ती अपनी मां से मिलने के बाद, अपनी मां को पानी देने की जिद करने लगे।

जिस पर उन्होंने मरीज के बेटे से कहा कि, मरीज के शरीर में ज्यादा सुजन है तथा ओवर फ्लूड की स्थिति से बचाने के लिए पानी नही देना है, लेकिन संभवतः मरीज चंद्रमुखी कुमारी के पुत्र किशोर कुमार अपनी आधी अधूरी चिकित्सीय जानकारी, व सर्च ईंजन गुगल से प्राप्त ज्ञान के आधार पर उनके द्वारा लगातार मरीज के ईलाज में हस्तक्षेप किया जाता रहा, तथा बीमा का पैसा प्राप्त करने के उद्देश्य से लगातार मनचाही रिपोर्ट लिखने का दबाव भी बनाया जा रहा था।

यही नहीं! मरीज के पुत्र किशोर कुमार दवा की खरीदारी करने व अस्पताल की बकाया राशि देने में भी आनाकानी करते हुए, अस्पताल कर्मी के साथ अपशब्दों का प्रयोग करते रहे। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि, मरीज के पुत्र मरीज के प्राणों की रक्षा करने को इच्छुक नहीं थे, बल्कि बीमा के पैसों के लिए उतावले थे, जबकि उक्त महिला मरीज के गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्होंने गुरूवार 01 जनवरी को ही पटना या अन्य किसी बड़े अस्पताल में ले जाने का सलाह दिया था, लेकिन “भारतीय जनता पार्टी” चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ यू॰ एस॰ झा के कहने पर अस्पताल में भर्ती कर लिया गया था।

इधर मरीज के भर्ती करने के 08 दिन बाद 09 जनवरी को मरीज चंद्रमुखी के परिजन मरीज को बगैर अस्पताल का बकाया राशि भुगतान किए रेफर करने की जिद करते हुए अपने अन्य परिजनों को अस्पताल बुलाकर हंगामा करने लगे। हंगामे के दौरान किशोर कुमार का भाई मुकेश कुमार तथा उसका भांजा शुभम कुमार सहित अन्य लोग भी इस हंगामा में शामिल रहे। जब उनके अस्पताल कर्मियों ने उनलोगों को हंगामा करने से रोकना चाहा, तो वहलोग अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट करने पर अमादा हो गए।

जिसके बाद उन्होंने इसकी सुचना डायल नंबर 112 को दिया। सुचना मिलने के बाद डायल नंबर 112 की टीम मौके पर पहुंची, तथा हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। जिसके बाद उन्होंने भी प्रशासन की मौजूदगी में ही मरीज के परिजन के कहने पर मरीज को बिना अस्पताल की बकाया राशि का भुगतान किए, सही सलामत जीवित अवस्था में रेफर कर दिया गया। इस दौरान मरीज चंद्रमुखी कुमारी ने डायल नंबर 112 की टीम को अपना बयान भी दिया, जिसमें मरीज ने अस्पताल प्रबंधन के ईलाज से संतुष्ट होने की बात बतायी, तथा यह भी बताया कि, “कमला ईमरजेंसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल” के नर्सिंग स्टाफ काफी अच्छे हैं और उनके द्वारा काफी अच्छे से उनकी देखभाल की जा रही थी।

मरीज के इस बयान को डायल नंबर112 की टीम ने अपने कंट्रोल रूम को भी प्रेषित कर दिया। जिसके बाद उन्होंने भी मरीज चंद्रमुखी कुमारी को पुलिस प्रशासन के सामने ही रेफर कर दिया। घटना के एक दिन बाद ही मरीज की मौत कैसे हो गयी, इस पर उन्होंने गहरा आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि, जिस मरीज को सही-सलामत बातचीत करते हुए उन्होंने रेफर किया था, उसकी अचानक मौत कैसे हो गयी ?

इस पर उन्होंने आशंका व्यक्त किया है कि, ऐसी संभावना है कि मरीज के परिजनों द्वारा उक्त मरीज को अवश्य ही अत्यधिक पानी तो नहीं दे दी गयी थी ? जिससे Trached aspiration का खतरा बढ़ गया और मरीज की मौत हो गयी ? इस दौरान डॉ राजेश कुमार झा ने यह भी कहा कि, पटना जैसे शहर में जहां एम्स/आईजीआईएमएस/मेदांता जैसे बड़े अस्पताल है, वहां मरीज को नही ले जाकर, कंकड़‌बाग जैसे जगह पर किसी छोटे अस्पताल में क्यों ले जाया गया?

मरीज के मौत हो जाने के बाद शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया ? इस पर उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए बताया कि, मरीज के परिजनों के इस तरह की गतिविधि‌यों से उन्हें संदेह उत्पन्न होता है कि, इस घटना में जरूर कोई अतिरिक्त बातें भी है, जो मरीज के परिजन पुलिस प्रशासन तथा उनलोगों से छुपा रहे हैं। इतना ही नही! इतना कुछ हो जाने के बाद भी मृतक के परिजन लगातार घटना के बाद से सोशल मिडिया का सहारा लेकर उनके अस्पताल की प्रतिष्ठा व छवि बिगाड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं।

इस दौरान उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन से माँग किया है कि, अस्पताल में हंगामा करनेवाले मरीज चंद्रमुखी कुमारी के परिजनों पर मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की जाए, साथ ही सोशल मिडिया पर खबरें प्रकाशित करने वाले लोगों से भी उन्होंने कहा कि, मरीज के परिजन व उनके साथ जो असामाजिक तत्व के लोग थे, जिनका बयान लेकर एकतरफा खबरें प्रकाशित की जा रही है, इस तरह की खबरें प्रकाशित ना करें।

अगर खबर प्रकाशित ही करनी हो तो अस्पताल प्रबंधन का भी वर्जन लेकर ही खबर का प्रकाशन करें, तथा एक आदर्श पत्रकारिता को बढ़ावा दें। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि, अस्पताल के बारे में इस तरह की नकारात्मक बयान देने वालों सहित इससे संबंधित सभी लोगों के खिलाफ वह बहूत जल्द मानहानि का मुकदमा करने की तैयारी में भी जुटे हुए हैं।

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