समस्तीपुर। शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर नगर निगम लगातार सक्रिय होने का दावा करता है। सड़क किनारे ठेला, रेहड़ी, रिक्शा, फल एवं सब्जी बेचकर जीविकोपार्जन करने वाले लोगों पर कार्रवाई भी की जाती है। लेकिन नगर निगम कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने दिनभर खड़ी रहने वाली दर्जनों मोटरसाइकिलों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों के बीच कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में बाइकें खड़ी रहती हैं। इसके कारण कार्यालय के समीप स्थित बाबा थानेश्वर मंदिर के निकास मार्ग वाली सड़क पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। राहगीरों, मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं तथा आसपास के दुकानदारों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों का सवाल है कि जब सड़क किनारे छोटे व्यवसाय करने वाले गरीब लोगों के ठेले, रेहड़ियां और दुकानें अतिक्रमण के नाम पर हटाई जा सकती हैं, तो फिर नगर निगम कार्यालय के सामने घंटों तक खड़ी रहने वाली बाइकें अतिक्रमण की श्रेणी में क्यों नहीं आतीं? यदि सड़क और सार्वजनिक मार्ग पर वाहन खड़ा करना नियमों का उल्लंघन है, तो इन वाहनों का चालान क्यों नहीं काटा जाता?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई बार इस समस्या की ओर अधिकारियों का ध्यान भी दिलाया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम मुख्यालय के सामने अव्यवस्थित पार्किंग के कारण यातायात प्रभावित होता है, बावजूद इसके संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो मुख्य द्वार के सामने खड़ी रहने वाली अधिकांश बाइकें नगर निगम के कर्मचारियों एवं कार्यालय से जुड़े लोगों की बताई जाती हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन इस चर्चा ने आम नागरिकों के बीच यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या नगर निगम कर्मियों के लिए अलग और आम जनता के लिए अलग नियम लागू हैं?
शहरवासियों का कहना है कि यदि नगर निगम वास्तव में अतिक्रमण मुक्त शहर बनाने को लेकर गंभीर है तो उसे सबसे पहले अपने कार्यालय परिसर एवं उसके आसपास की व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। आम लोगों पर कार्रवाई करने से पहले विभाग को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।
नागरिकों ने महापौर एवं उपमहापौर से मांग की है कि नगर निगम कार्यालय के सामने अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों की जांच कराई जाए, व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों के विरुद्ध नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। लोगों का मानना है कि ऐसा होने पर न केवल जाम की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, नगर निगम के मुख्य द्वार के सामने रोजाना बनने वाली इस समस्या पर महापौर, उपमहापौर और नगर निगम प्रशासन की नजर कब पड़ती है और शहरवासियों को जाम की समस्या से कब निजात मिलती है।







