धोबियाही पोखर पर मनरेगा से बनी सड़क की उपयोगिता पर सवाल, ग्रामीण बोले- “इस रास्ते पर आदमी नहीं, केवल भूत-प्रेत चलते हैं”

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समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड की लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में मनरेगा योजना के तहत कराए गए एक निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा और नाराजगी का माहौल है। पंचायत के धोबियाही पोखर के भिंडा (किनारे) पर मनरेगा योजना से निर्मित सड़क की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों का कहना है कि, इस सड़क का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है, और सरकारी राशि खर्च कर केवल कागजी विकास दिखाने का प्रयास किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर सड़क का निर्माण कराया गया है, वहां न तो कोई प्रमुख आवागमन मार्ग है और न ही बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। स्थानीय लोगों का तंज है कि इस सड़क पर इंसानों से ज्यादा “भूत-प्रेत” ही आते-जाते होंगे, क्योंकि आम ग्रामीणों के लिए इस सड़क का कोई खास महत्व या उपयोगिता दिखाई नहीं देता।

लाखों खर्च, लेकिन जनहित पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा का उद्देश्य गांव में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है जिससे अधिकतम लोगों को लाभ मिले तथा रोजगार के अवसर सृजित हों। लेकिन धोबियाही पोखर के भिंडा पर बनाई गई सड़क को देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि, आखिर इस योजना का चयन किस आधार पर किया गया और इससे कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिलने वाला है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत में कई ऐसी सड़कें, नालियां और सार्वजनिक स्थल हैं जिन्हें मरम्मत एवं विकास की आवश्यकता है, लेकिन उन स्थानों को छोड़कर ऐसे स्थल पर सरकारी राशि खर्च कर दी गई जहां जन उपयोगिता बेहद सीमित है।

योजना चयन प्रक्रिया की जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति तथा स्थल चयन की प्रक्रिया की जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि ग्राम सभा में इस योजना का प्रस्ताव पारित हुआ था या नहीं तथा निर्माण कार्य से कितने परिवारों को वास्तविक लाभ मिल रहा है।

मनरेगा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी योजना का चयन करते समय उसकी सामाजिक एवं आर्थिक उपयोगिता का आकलन किया जाना आवश्यक है। यदि किसी योजना से आम लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलता है तो उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन जनता के टैक्स का पैसा होता है और उसका उपयोग ऐसी योजनाओं में होना चाहिए जिससे गांव के अधिकाधिक लोगों को सुविधा मिले। लोगों ने जिला प्रशासन एवं मनरेगा विभाग के अधिकारियों से योजना की उपयोगिता का मूल्यांकन कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों एवं मनरेगा विभाग के अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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