नाजिरपुर में मनरेगा के नाम पर खेल! 704 मजदूरों की हाजिरी, लेकिन धरातल पर नहीं दिख रहा काम?

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समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड की नाजिरपुर पंचायत में मनरेगा योजनाओं के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रखंड की सभी पंचायतों में सबसे अधिक 704 मनरेगा मजदूर नाजिरपुर पंचायत में कार्यरत दिखाए गए हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि धरातल पर स्थिति सरकारी आंकड़ों से बिल्कुल अलग है और अधिकांश योजनाओं में मजदूरों के स्थान पर मशीनों का उपयोग किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन नाजिरपुर पंचायत में विकास कार्यों के दौरान मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से कार्य कराए जाने की शिकायत लंबे समय से उठती रही है। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में सैकड़ों मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत रोजगार सेवक द्वारा अपने सहयोगियों और कथित दलालों के माध्यम से कार्यस्थलों की निगरानी की जाती है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई मामलों में वास्तविक समय पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के बजाय पहले से ली गई तस्वीरों का उपयोग कर जियो-टैगिंग और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है।

मनरेगा में वर्तमान व्यवस्था के अनुसार श्रमिकों की उपस्थिति एनएमएमएस ऐप के माध्यम से फोटो और जियो-टैगिंग के आधार पर दर्ज की जाती है। इस प्रणाली का उद्देश्य फर्जी उपस्थिति रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन नाजिरपुर पंचायत में सरकार के इन दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि, यदि नाजिरपुर पंचायत में वास्तव में 704 मजदूर कार्यरत हैं तो, संबंधित योजनाओं का भौतिक सत्यापन कर मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, कार्य की प्रगति तथा भुगतान अभिलेखों की जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि योजनाओं का नियमित निरीक्षण नहीं होने के कारण अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि, पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन में पंचायत प्रतिनिधियों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी राशि के दुरुपयोग का खेल चल रहा है। कुछ ग्रामीणों ने पंचायत रोजगार सेवक, संबंधित तकनीकी कर्मियों एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।

जानकारों का बताना है कि, मनरेगा के तहत कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति, कार्य की मापी, मस्टर रोल, जियो-टैग्ड फोटो तथा तकनीकी सत्यापन की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है, ताकि योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे। कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण प्रखंड एवं जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाना भी व्यवस्था का हिस्सा है।

मनरेगा दिशानिर्देशों के अनुसार कार्यस्थल पर नागरिक सूचना बोर्ड, मस्टर रोल, कार्य की मापी, पेयजल, प्राथमिक उपचार एवं अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा निरीक्षण अधिकारियों की टिप्पणियां भी अभिलेखों में दर्ज होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा) एवं ग्रामीण विकास विभाग से मांग की है कि नाजिरपुर पंचायत में संचालित सभी मनरेगा योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही मस्टर रोल, जियो-टैग्ड उपस्थिति, भुगतान विवरण, तकनीकी स्वीकृति एवं कार्यस्थल निरीक्षण रिपोर्ट की भी जांच की जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

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