अरविन्द कुमार/अमित कुमार:( समस्तीपुर) बिहार में सत्ता संरक्षित बढ़ते अपराध के खिलाफ, भाकपा-माले एवं खेग्रामस के बैनर तले राज्य कमेटी के आह्वान पर, सोमवार 23 सितम्बर को सरकारी बस स्टैंड से प्रतिरोध मार्च निकाला गया। यह प्रतिरोध मार्च पोस्ट ऑफ़िस, स्टेडियम गोलंबर, समाहरणालय होते हुए पुनः पोस्ट आफिस के पास पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया।

आयोजित इससभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव उमेश कुमार ने कहा कि, बिहार में सत्ता संरक्षित अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। विगत दिनों अरवल में भाकपा-माले नेता सुनील चन्द्रवंशी की हत्या कर दी गयी, तथा नवादा में मांझी व रविदास जाति के बकरी, मुर्गा-मुर्गी सहित 80 घरों को जला दिया गया। बोधगया में महादलित बस्ती पर कातिलाना हमले किए गए, इमामगंज में राजकुमार मांझी की हत्या कर दी गई,

टिकारी में संजय मांझी का बांह काट धड़ से अलग कर दिया गया, शेरघाटी में मांझी परिवार की नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार और रोहतास कैमूर पहाड़ी के खिड़की घाट में नागाटोली निवासी उमेश पासवान की पत्थरों से कुंच कर हत्या कर दी गई, विक्रमगंज के शिवपुर में सरपंच की गोली मारकर हत्या सहित रोहतास में अपराधियों के द्वारा बेखौफ होकर दर्जनों अपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया गया।
वहीं समस्तीपुर के विद्यापतिनगर में खट्टीक सरजुल कुरैशी को को पीटा गया। अभी हाल ही में गंगापुर में फर्जी चिकित्सक ने अपने ही नर्स के साथ रेप की कोशिश की। हकीमाबाद में नाबालिग छात्रा के साथ कथित रेप-हत्या हुई। न्याय मांग रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर जेल में बंद कर दिया। नीमगली के बेचू सेठ की हत्या कर दी गई।
वनबीरा में मुखिया नारायण शर्मा की हत्या कर दी गई। पूरे राज्य में प्रतिदिन अपराध-हत्या की सैकड़ों वारदातें हो रही है। सभा को संबोधित करते हुए खेग्रामस जिला सचिव जीबछ पासवान ने कहा कि नवादा में महादलित परिवारों के घरों में दिनदहाड़े आग लगाने वाले सत्ता संरक्षित भूमाफिया हैं, और इसी कारण सरकार ने अबतक चुप्पी साधी हुई है।
उन्होने दलित नेताओं जैसे जीतन राम मांझी और चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए कहा कि, वह इन पीड़ित महादलित परिवारों की व्यथा को अनदेखा कर रहे हैं, क्योंकि उनके राजनीतिक आकाओं ने उन्हें चुप रहने की हिदायत दे रखी है। बिहार में अपराधियों का मनोबल बढ़ चुका है। पुलिस द्वारा दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार हो रहा है, और कोई भी व्यक्ति सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।
हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाओं से प्रतिदिन अखबार और सोशल मीडिया भरे पड़े रहते हैं। फिर भी सरकार इसे “सुशासन” कहती है। अगर यही तथाकथित सुशासन है तो कुशासन कैसा होगा ? सभा को भाकपा-माले के संजीत पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, गंगा प्रसाद पासवान, खुर्शीद खैर, आसिफ होदा, कौसर अख्तर खलील, अनील चौधरी, मो० अलाउद्दीन, माले राज्य कमिटी सदस्य नेयाज अहमद, इंसाफ मंच के दरभंगा राज्य कमिटी सदस्य पप्पू खां आदि नेताओं ने भी संबोधित किया।







