पटना: बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को समय पर और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई अहम फैसले लिए हैं।

जिला प्रशासन को सौंपी गई जिम्मेदारी
आयोग ने सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों (DM) को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के रूप में नामित कर दिया है। वहीं, जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को उप निर्वाचन पदाधिकारी बनाया गया है। इसके साथ ही चुनाव की पूरी जिम्मेदारी अब जिला प्रशासन के हाथों में आ गई है।
नवंबर-दिसम्बर में हो सकते हैं चुनाव
आयोग के संकेत के अनुसार, पंचायत चुनाव की वोटिंग नवम्बर –दिसम्बर 2026 के बीच कराई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची अपडेट, बूथ प्रबंधन और अन्य तैयारियों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहली बार EVM से होगा मतदान
इस बार का चुनाव कई मायनों में खास होगा। पहली बार पंचायत चुनाव में (Electronic Voting Machine) ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। अब तक यह चुनाव बैलेट पेपर से होते थे।
मल्टी पोस्ट EVM का होगा उपयोग
एक कंट्रोल यूनिट के साथ 6 बैलेट यूनिट जुड़ी होंगी। जिससे मतदाता एक ही जगह से मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच आदि पदों के लिए वोट दे सकेंगे
फेशियल रिकग्निशन से फर्जी वोटिंग पर लगेगी रोक
चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए इस बार Facial Recognition Technology का भी उपयोग किया जाएगा। जिसके लिए सभी बूथों पर कैमरे लगाए जाएंगे। जिससे मतदाताओं की तुरंत पहचान हो जाएगी और फर्जी मतदान पर रोक लगाने में मदद भी मिलेगी।
आरक्षण रोस्टर में होगा बदलाव
चुनाव से पहले आरक्षण रोस्टर को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों से वार्डवार आंकड़े मांगे गए हैं। नियमों के अनुसार हर 10 साल में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किया जाता है।
पुराने परिसीमन के आधार पर ही होगा चुनाव
इस बार चुनाव पुराने परिसीमन (Delimitation) के आधार पर ही कराए जाएंगे। राज्य सरकार ने अभी क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया है।
ढाई लाख पदों पर मतदान
बिहार पंचायत चुनाव 2026 में करीब 2.5 लाख पदों पर वोटिंग होगी, जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद के विभिन्न पद शामिल हैं। बिहार पंचायत चुनाव 2026 इस बार तकनीक और पारदर्शिता के नए प्रयोगों के साथ होने जा रहा है। EVM और फेशियल रिकग्निशन जैसे आधुनिक उपायों से जहां मतदान प्रक्रिया आसान होगी, वहीं चुनाव में धांधली पर भी काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है।







