अरविन्द कुमार/अमित कुमार:(समस्तीपुर) जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के समक्ष बिहार प्रदेश जीविका कैडर संघ की दीदियों ने, शुक्रवार 27 सितम्बर को अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया तथा सरकार विरोधी नारे लगाए। इससे पूर्व सरकारी बस पड़ाव से हजारों की संख्या में जीविका दीदीयों ने, मार्च निकालते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सरकारी बस पड़ाव से निकाली गयी यह मार्च पटेल गोलंबर होते हुए समाहरणालय पहुंचकर प्रदर्शन के बाद, सड़क जाम कर यातायात बाधित करते हुए एक सभा में तब्दील हो गया।

जीविका कैडर संघ की जिलाध्यक्ष अनुपम कुमारी ने कहा कि, जीविका महिला सशक्तिकरण के लिए बिहार सरकार की एक परियोजना है। जिससे महिलाएं जुड़ी हुई है। विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन में जीविका दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन सरकार हमारे साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
बिहार सरकार के द्वारा प्रायोजित सभी प्रकार के कार्यों में जीविका दीदी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती रही है। अब चाहे वह कार्य सामाजिक हो, अर्थिक सशक्तिकरण हो या फिर वित्तीय साक्षरता, शराबबंदी, मानव श्रृंखला, मनरेगा सर्वेक्षण, वृक्षारोपन, दीदी की रसोई, नीरा उत्पादन, विद्यालय सर्वेक्षण या स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण हीं क्यों न हो।
सभी कार्यों में जीविका दीदीयों ने जमीनीं स्तर पर पर काम किया है। जिविका दीदीयों ने सभी प्रकार के कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है, तथा उन कार्यों को सफल बनाकर एक किर्तिमान स्थापित किया है। बाबजूद जीविका दीदी के हितों की अनदेखी की जा रहीं है। उन्हें मिलने वाली राशि में भी भारी कटौती की गई है।
जमीनी स्तर के कार्यकर्त्ताओं को मिलने वाली पारिश्रमिक इतनी कम है कि, जीवनयापन करना तो दुर की बात है, सरकार की ओर से मिलने वाली पारिश्रमिक के बारे में किसी को बताने में भी शर्म आती है। उन्होंने बताया कि सभी कैडरों को जीविका की ओर से नियुक्ति पत्र एवं पहचान पत्र दिया जाए, मानदेय कंट्रीब्यूशन सिस्टम पर अविलंब रोक लगे, सभी कैडरों का नियमित मानदेय के रूप में 25 हजार प्रति महीना के रूप में भुगतान हो,
काम पर से हटाने की धमकी पर रोक लगे तथा धमकी देने वाले पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, सभी कैडरों का क्षेत्र भ्रमण भत्ता के रूप में कम से कम 3 हजार रूपए का भुगतान हो, महिला विकास निगम के अस्तित्व को बरकार रखते हुए मानदेय में वृद्धि की जाए, सभी अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को क्रमशः संकुल स्तर पर 5 सौ, ग्राम संगठन स्तर पर 3 सौ, स्वयं सहायता समूह स्तर पर 2सौ रुपये प्रति बैठक भत्ता का भुगतान की जाए,
पांच साल पुराने सभी जीविका दीदियो का ऋण माफ किया जाए, परियोजना में तीन साल पूरा करने वाले कैडरों के लिए स्टाफ के रूप में पदोन्नति की व्यवस्था हो तथा सभी कैडरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ, अवकाश, महिला कैडरों को विशेष अवकाश, मातृत्व अवकाश, 2 लाख का मेडिक्लेम एवं 5 लाख का डेथ क्लेम की सुविधा दी जाने की मांग सरकार से की।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी समस्तीपुर से मिलकर अपनी मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा। मौके पर जिले की सैकड़ों जीविका दीदी मौजूद रही।







