विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद नाव बना सहारा, जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर हजारों लोग

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भागलपुर: विक्रमशिला सेतु के स्लैब टूटने के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। पुल पर यातायात पूरी तरह बंद होने के कारण अब हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा नदी को नाव के सहारे पार करने को मजबूर हैं।

घटना के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। जिससे रोजमर्रा के कामकाज, व्यापार और आपात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ऐसे में लोग घंटों इंतजार करने के बजाय नाव का सहारा ले रहे हैं, भले ही इसमें बड़ा खतरा क्यों न हो।

नावों पर बढ़ा दबाव, हादसे का खतरा:
स्थानीय घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ रही है। सीमित संख्या में उपलब्ध नावों पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अभी तक पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल:
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बंद होने के बाद प्रशासन को तुरंत सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे आम जनता की परेशानी और बढ़ गई है।

जिंदगी और मजबूरी के बीच संघर्ष:
दैनिक मजदूरी करने वाले, छात्र और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई लोग इलाज, नौकरी और जरूरी कामों के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।

प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील जरूर की है, लेकिन जब तक सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक यह जोखिम भरा सफर जारी रहने की आशंका है।

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