दिल्ली में आज भी अधूरे वादों की गूंज, अब ‘सोनार बांग्ला’ के प्रलोभन में फंसी बंगाल की भोली-भाली जनता!

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नई दिल्ली/कोलकाता:(ब्यूरो रिपोर्ट  नई दिल्ली) चुनावी राजनीति में बड़े-बड़े वादे करना आम बात है, लेकिन उनकी असली परीक्षा सत्ता में आने के बाद होती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान, दिल्ली वासियों के लिए दर्जनों लोक-लुभावने वादे किए थे। ठीक उसी तरह भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान भी आकर्षक वादों की झड़ी लगा दी।

हालांकि उन वादों का असर बंगालवासियों पर हुआ भी। जिसके बदौलत वह बंगाल में अब सरकार भी बनाने जा रही है! लेकिन अब सवाल यह पैदा लेता है कि, क्या बाजपा बंगाल को “सोनार बांग्ला” बनाएगी या दिल्ली की तरह उनका यह आकर्षक दावा बंगाल में भी मुंह के बल गिरेगी ?

क्योंकि भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के समय जितने भी वादे किए थे, उनमे से कुछ वादों पर ही काम किया गया है! बांकी सारे वादे ढ़ाक के तीन पात ही साबित हुए हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के समय भाजपा ने, महिलाओं, गरीबों और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखते हुए कई लोक-लुभावन वादे किए थे।

जिसमें महिलाओं को 2500 रूप्ये प्रति माह आर्थिक सहायता देना, सामान्य समय में 500 रूपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना तथा त्योहारों में मुफ्त सिलेंडर देना, गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रूपए की सहायता देना, अटल कैंटीन का निर्माण कर 5 रूपए में भरपेट भोजन देना, आयुष्मान भारत के तहत 5-10 लाख रूपए का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना, प्रदुषण मुक्त दिल्ली बनाना सहित कई अन्य वादे भी किए गए!

लेकिन आज दिल्ली में भाजपा सरकार के पुरे एक साल पुरे होने में कुछ ही दिन बांकी है, लेकिन आज तक भाजपा की सरकार ने महिलाओं को 2500 रूपए प्रति माह देने तक का वादा पुरा नही किया! गर्भवती महिलाओं को 21000 हजार रूपए देना तो दुर की बात है। 500 रूपए में गैस सिलेंडर देने का वादा तक नही निभाया!

त्योहारों में मुफ्त सिलेंडर कहां से देंगे। दिल्ली का प्रदुषण बीते 22 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ चुका है। अगर साधारण लफ्जों में कहें तो भाजपा के द्वारा दिल्ली की सल्तनत पाने के लिए जो भी वादे किए गए थे, सभी वादे झूठ और फरेब था।

रोजगार और महंगाई अभी भी दिल्ली की आम जनता के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि दिल्ली सरकार का कहना है कि, कई योजनाएं प्रक्रिया में है, और उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। वहीं विपक्ष आरोप लगा रहा है कि “चुनावी वादे अब भी कागजों तक ही सीमित हैं।”

बंगाल चुनाव 2026: ‘सोनार बांग्ला’ का नारा

अब भाजपा की नजर पश्चिम बंगाल पर थी जो अब पुरी हो चुकी है। भाजपा ने एक बार फिर बंगाल वासियों को “सोनार बांग्ला” का सपना दिखाकर बेवकूफ बनाने में कामयाबी पा ली है।

भाजपा ने दिल्ली के तरह ही बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान अपने लोक-लुभावन वादे और चिकनी चुपड़ी बातों से सत्ता हथियाने में कामयाब हो गयी। भाजपा ने अपने प्रमुख वादों में, महिलाओं को आर्थिक सहायता, युवाओं को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता, Uniform Civil Code (UCC) लागू करने, Citizenship Amendment Act (CAA) लागू करने में तेजी लाने, आयुष्मान भारत का विस्तार करने, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना आदि शामिल रहा।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, चुनावी घोषणाएं उम्मीदें तो जगाती हैं, लेकिन बजट की सीमाएं, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और जमीनी चुनौतियां उनके क्रियान्वयन में बाधा बनती हैं। अब सवाल यह है कि, जब वादे पुरे नही हो सकते तो वैसे वादे लोगों से किए क्यूं जाते हैं ? 

क्या चुनावी वादे केवल सत्ता तक पहुंचने का माध्यम हैं या वास्तव में जनता के जीवन में बदलाव लाने का संकल्प। हालांकि चाहे दिल्ली हो या पश्चिम बंगाल, अब जनता की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि उनके धरातल पर उतरने पर है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि “सोनार बांग्ला” का सपना हकीकत बनता है या यह भी एक और चुनावी नारा बनकर रह जाता है। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले विधानसभा चुनाव में दिल्ली और पश्चिम बंगाल से भाजपा (BJP) का सुपड़ा साफ हो जाएगा।

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