???? बिग ब्रेकिंग: उजियारपुर थाना को संचालित करता है थानाध्यक्ष का निजि चालक, थाना के हाजत में बंद शराब बरामदगी मामले का थाना कांड संख्या 129/24 के नामजद आरोपित को थानाध्यक्ष ने निजि चालक के कहने पर थाना से ही छोड़ा

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अरविन्द कुमार/अमित कुमार:[ समस्तीपुर ] उजियारपुर थाना क्षेत्र के भगवानपुर देसुआ पंचायत निवासी, शराब धंधेबाज मनिष चौरसिया को उजियारपुर पुलिस के द्वारा थाना क्षेत्र के धमुआं चौक से गिरफ्तार कर थाने लाकर एक मोटी रकम की वसुली कर, करीब 2 घंटा बाद थाना पर से ही छोड़ दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है।

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद उजियारपुर थानाध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर, क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हो गई है। लोग उजियारपुर थानाध्यक्ष के संबंध में तरह तरह की बातें करने लगे हैं। पुलिस सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार 29 जुलाई को थाना क्षेत्र में गश्ती के दौरान उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने, उजियारपुर थाना कांड संख्या 129/24 के नामजद अभियुक्त मनिष चौरसिया को हिरासत में लिया था।

गिरफ्तार मनिष चौरसिया को उजियारपुर थानाध्यक्ष ने, थाना क्षेत्र में कार्यरत डायल नंबर 112 के पुलिस पदाधिकारी PTC रघु कुमार को धमुआं चौक पर बुलाकर, एक चौकीदार पुत्र को गिरफ्तार आरोपित मनिष चौरसिया के साथ में रखकर थाना भेज दिया। जहां उसे उजियारपुर थाना के हाजत में बंद करके रखा भी गया, लेकिन महज कुछ घंटे के बाद ही थानाध्यक्ष के निजि चालक संजीत कुमार ने, थानाध्यक्ष के आदेश पर नामजद अभियुक्त मनिष चौरसिया के परिजनों से संपर्क कर, करीब एक लाख रूप्ये की अवैध वसुली कर, थाना परिसर से ही छोड़ दिया।

इस मामले की शिकायत भगवानपुर देसुआ पंचायत निवासी, जदयू नेता ने दलसिंहसराय एसडीपीओ विवेक कुमार शर्मा से भी किया है। जिसमें एसडीपीओ दलसिंहसराय विवेक कुमार शर्मा ने कहा है कि, इस मामले की जानकारी उन्हें नही है। जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है, उक्त घटना के 72 घंटा बीत जाने के बाद भी, उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गयी है।

उजियारपुर थानाध्यक्ष ने अपने निजि चालक के साथ मिलकर इतने बड़े घटना को अंजाम दे दिया, जबकि थाना कांड संख्या 129/24 के तहत दर्ज प्राथमिकी के आवेदक भी थानाध्यक्ष उजियारपुर मुकेश कुमार स्वयं हैं। हालांकि थानाध्यक्ष उजियारपुर मुकेश कुमार के द्वारा किए गए इस सारी घटनाक्रम का ऑडियो क्लिप बिहार की आवाज न्यूज़ रूम के पास सुरक्षित है। जिसका अध्ययन करने से एक बात तो साफ हो जा रही है कि, शराब धंधेबाज मनिष चौरसिया को थानाध्यक्ष के द्वारा पकड़े जाने से लेकर छोड़े जाने तक की जानकारी थाना क्षेत्र के लोगों के पास है।

हालांकि उक्त शराब कारोबारी को गिरफ्तार करने की सुचना, उजियारपुर थाना क्षेत्र में कार्यरत चौकीदार पुत्र ने, एसडीपीओ दलसिंहसराय विवेक कुमार शर्मा को भी दिया है। एसडीपीओ विवेक कुमार शर्मा को दिए जाने वाले सूचना में, चौकीदार पुत्र ने बताया है कि, विगत माह शुक्रवार 05 जुलाई 2024 को, भगवानपुर देसुआ गांव से शराब बरामद हुआ था।

जिसके नामजद अभियुक्त मनीष चौरसिया को धमुआं चौक से गिरफ्तार किया गया था। जिसे उसने डायल नंबर 112 की गाड़ी से ले जाकर थाना के हाजत में बंद भी किया था। आपको बता दें कि यह वही मनिष चौरसिया है, जिसके खिलाफ गुप्त सुचना के आधार पर भगवानपुर देसुआ गांव से रेबाड़ी जाने वाली रास्ते में से, सड़क किनारे से शराब की एक बड़ी खेप उतारे जाने मामले में छापामारी कर 20 कार्टून में बंद 695 बोतल शराब बरामद करते हुए, भगवानपुर देसुआ गांव के ही मुकेश राय, अर्जून राय तथा मनीष चौरसिया के विरूद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज किया था।

जिसमें से तीसरे नंबर के आरोपी मनीष चौरसिया को, उजियारपुर पुलिस ने सोमवार 29 जुलाई को थाना क्षेत्र के धमुआं चौक से गिरफ्तार कर थाने लायी, और मोटी रकम की वसुली करने के बाद उसे छोड़ दिया। आपको बता दें कि उजियारपुर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के निजी चालक संजीत कुमार का, थाना क्षेत्र के सभी शराब माफियाओं से अच्छी खासी दोस्ती है।

थाना क्षेत्र के स्थानीय सूत्रों का तो यहां तक बताना है कि, उजियारपुर थानाध्यक्ष के रूप में मुकेश कुमार के कार्यभार संभालने के बाद, मात्र चार महीनों के अंदर उजियारपुर थाना के इस निजी चालक संजीत कुमार ने, करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली है, जबकि चालक के रूप में उसे थानाध्यक्ष के द्वारा मात्र 6 हजार रूप्ये प्रति माह दिया जाता है, और उसके पास आमदनी का कोई दुसरा स्रोत भी नही है।

उसके बाद भी थानाध्यक्ष के निजि चालक संजीत कुमार पास मात्र 4 से 6 माह के अंदर करोड़ों की संपत्ति कहां से आ गयी। करोड़ों की संपत्ति में उसके पास करीब 50 लाख की लागत से बना पक्का मकान, 20 लाख की एक चार पहिया वाहन [स्कॉर्पियो] दो-दो आईफोन, टीवी, फ्रीज, वाशिंग मशीन तथा लाखों के जेवरात सहित दो-दो बाईक आदि भी शामिल है।

आखिर उजियारपुर थानाध्यक्ष के रूप में मुकेश कुमार के द्वारा, कार्यभार संभालने के बाद मात्र 4-6 माह के अंदर 6 हजार की नौकरी करने वाले के पास, करोड़ों की संपत्ति कहां से आ गयी। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि, इस मामले में पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारी थानाध्यक्ष उजियारपुर मुकेश कुमार तथा उनके निजि चालक संजीत कुमार के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।

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