समस्तीपुर। जिला मुख्यालय स्थित यातायात थाना के पुलिस पदाधिकारियों द्वारा यातायात व्यवस्था को सुचारू करने का लाख दावा कर लिया जाए, लेकिन उनका यह दावा विगत एक सप्ताह से झूठा ही साबित होता दिख रहा है। क्योंकि विगत एक सप्ताह से यातायात थाना के नाक के नीचे जिलाधिकारी आवास से लेकर मोहनपुर के नक्कू स्थान तक तीन किलोमीटर में रोजाना 1 से 3 घंटों तक सड़क जाम रहता है।

जिसके कारण इस जाम में फंस कर आपातकालीन वाहन भी घंटों रेंगते रहता है। इस जाम के कारण दोपहिया वाहन वाले तो किसी प्रकार अलग अलग रास्तों से होकर निकलने में कामयाब तो हो जाते हैं, लेकिन चारपहिया वाहन वाले जाम में फंसकर कराहते रह जाते हैं। जिससे स्पष्ट होता है कि, जिला मुख्यालय में यातायात व्यवस्था पुरी तरह चौपट हो चुकी है।
इस दौरान आपको कहीं पर भी यातायात पुलिस नही दिखेगी। अगर दिखेगी भी तो वह किसी ऑटो चालक, ई रिक्शा चालक या ग्रामीण क्षेत्र से बाजार किसी काम से आए बाईक चालक के आसपास मंडराते दिखेंगे। वह भी ऐसा नही है कि वह यातायात पुलिस उसे यातायात का नियम समझा रही हो या चालान काट रही होती है!
बल्कि वह उन ऑटो, ई रिक्शा व बाईक चालकों से अवैध राशि की उगाही करने में लगी रहती है। सोमवार 10 नवम्बर को भी मथुरापुर थाना क्षेत्र के झिल्ली चौक से लेकर नक्कू स्थान तक कुल 4 किलोमीटर में दो पहिया व चारपहिया वाहन घंटों जाम में फंसकर कराहती रही। इस दौरान मथुरापुर घाट से लेकर मोहनपुर के नक्कू स्थान तक, मथुरापुर घाट को छोड़कर कहीं पर भी यातायात पुलिस या होमगार्ड के जवान जाम छुड़ाते नही देखे गए।
वाहन चालकों ने अपनी खुद की समझदारी व धैर्य का परिचय देते हुए धीरे-धीरे अपने गंतव्य की ओर जाते देखे गए। हालांकि इस दौरान कुछ महामहिम की गाड़ियां भी इस जाम में फंसा हुआ दिखा, लेकिन चारपहिया वाहन का दरवाजा तक खोलने में असमर्थ रहने के कारण वह लोग भी अपने सुरक्षा गार्ड के साथ अपनी अपनी गाड़ियों में विवश होकर बैठे रहे।
इस दौरान जिलाधिकारी समस्तीपुर रौशन कुशवाहा भी अपने आवास से कार्यालय जाने के लिए निकले, लेकिन इस भीषण जाम के कारण वह भी अपने कार्यालय से चंद कदमों की दुरी पर रहते हुए भी वैकल्पिक रास्ता से अपने कार्यालय तक पहुंचना मुनासिब समझा और डाकघर के सामने स्थित सरकारी बस स्टैंड से होते हुए अपने कार्यालय पहुंचने के लिए निकल गए।
इस दौरान जिला परिवहन पदाधिकारी का वाहन भी काफी देर तक इस सड़क जाम में जिला समाहरणालय के मुख्य द्वार के पास कछुए की चाल से रेंगता रहा। जाम में फंसे लोगों का बताना था कि, जिला प्रशासन के द्वारा जिस किसी भी कर्मी को यातायात सुचारू करने का जिम्मेदारी दिया जाता है, वही लोग अपनी ड्यूटी छोड़कर कार्यस्थल पर कुर्सी पकड़कर बैठे हुए देखे जाते हैं या वाहन जांच के नाम पर अवैध राशि की उगाही करते हुए देखे जाते हैं।
यातायात डीएसपी भी कुछ समय के अंतराल पर बेहतर यातायात व्यवस्था समस्तीपुर को देने की बात करते रहते हैं, लेकिन उन्हें शायद यह पता नही है कि, पब्लिक को बेहतर यातायात व्यवस्था देने के लिए होमगार्ड के जवान जैसे सारा दिन सड़क पर चिलचिलाती धूप में भी खड़ा रहना पड़ता है, ना कि एयरकंडीशन रूम में बैठकर यातायात सुदृढ़ करने का झूठा दावा करने से। दोपहर के 12:30 बजे लगा यह सड़क जाम, खबर लिखे जाने के समय 03:32 बजे तक नही समाप्त हो पाया था।







