अरविन्द कुमार/अमित कुमार:(समस्तीपुर) बिहार सरकार के द्वारा भूमि सर्वे कार्यक्रम से संबंधित काम प्रगति पर है। बिहार सरकार का यह सर्वे कार्यक्रम जनहित में है, और यह अच्छा काम भी है, लेकिन सर्वे का तरीका बिल्कुल गलत है। बिहार में स्थायी रूप से निवास करने वाले 90% लोगों के पास जमीन से संबंधित, ना तो पुरी जानकारी है, और ना ही संबंधित दस्तावेज ही है।

यही नही जिनके पास थोड़ी बहूत जानकारी है, वह सभी सर्वे का दुकान खोलकर बैठ गए हैं। आज इस सर्वे का आलम यह है की, एक फ़ॉर्म भरने के लिए कम से कम 500 रुपए चुकाने पर रहे हैं। यदि किसी भूस्वामी के पास दस केबाला है तो, उनको दस फ़ॉर्म भरने के लिए पांच हजार रुपए तक देने पड़ रहे हैं।
ये तो ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति है। वहीं अंचल कार्यालय से नकल निकालने के नाम पर भी, बिचौलियों और दलालों के द्वारा हजारों रुपए का नजराना मांगा जा रहा है। उक्त बाते पुर्व पंचायत समिति सदस्य सह समाजसेवी संजीव कुमार ने कही।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि, यदि सरकार सर्वे करवाना चाहती है तो, जिस प्रकार से जातिगत आधारित गणना घर घर जाकर की गयी थी, उसी प्रकार डोर टू डोर जाकर भूमि संबंधित सर्वे करे। अन्यथा इस सर्वे कार्यक्रम को बन्द कर दे।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि, इस सर्वे से पारिवारिक अपराध को काफी बढ़ावा मिला है। वहीं दुसरी ओर लोगों का आर्थिक और मानसिक शोषण भी हो रहा है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, अगर सरकार के पास इन सबका रिकॉर्ड है तो फिर, उसी रिकॉर्ड को प्राप्त करने के लिए आम लोगों का शोषण क्यों किया जा रहा है?
सरकार को इस पर संज्ञान लेकर इस गोरखधंधे को बंद करवाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि, वह सर्वे का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके तरीके गलत हैं। इस दौरान श्री कुमार ने यह भी बताया कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनहित की आड़ में, भूमि सर्वेक्षण की जो राजनीतिक चाल चली है, उसमें काफी धांधली शुरू हो गयी है। इस तरह की धांधली संभव है कि, उनकी सरकार के लिए शायद ताबूत की आखिरी कील साबित हो।
क्यों कि अपनी खानदानी जमीन की अपने नाम के कागजात नहीं होने। तथा फरीकी दुश्मनी के शिकार सभी लोग, अपनी जमीन से वंचित होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दुश्मन बनने जा रहे हैं। लोग प्रदेश से काम धंधा, मजदूरी छोड़कर बिहार आ रहे हैं, और बिहार में जमीन से संबंधित कागज का आलम यह है की, दरभंगा में पुराना पेपर सड़ा हुआ है और कुछ जिले में है तो उसे निकालने में दिन में तारे नजर आ रहे हैं।
सरकार को चाहिए कि, उसके पास जो भी रिकॉर्ड है उसे ठीक कर नया पोर्टल लॉंच कर उसपर सभी रिकॉर्ड डाल दे, ताकि लोगों को परेशानी न हो।







