???? बिग ब्रेकिंग: जननायक के धरती का सांसद शांभवी चौधरी ने किया अपमान, समस्तीपुर का ईतिहास है सैकड़ों वर्ष पुराना, सत्ता के दलालों ने नाबालिग सोच रखने वाली सांसद को पहुंचाया संसद भवन

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अरविन्द कुमार/अमित कुमार:(समस्तीपुर) जिले के ताजपुर राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष शफीउर रजा ने, सांसद शांभवी चौधरी के समस्तीपुर के बारे में दिए गए स्टेटमेंट की निंदा करते हुए कहा कि, यह समस्तीपुर हाजी शमसुद्दीन इलियासी व भारत रत्न स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर जी की धरती है। स्वर्गीय हाजी असलम सेठ हमेशा कहा करते थे कि, तुम सरैसा के हो। जब हमने पता किया कि यह सरैसा क्या है, तो पता चला कि समस्तीपुर का परंपरागत नाम ही सरैसा है।

13वीं सदी में पश्चिम बंगाल के मुसलमान शासक हाजी शमसुद्दीन इलियासी के समय मिथिला एवं तिरहुत क्षेत्रों का बंटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के ओईनवार राजा 1325 -1525 ईस्वी में कब्जे में था, जबकि दक्षिण और पश्चिमी भाग हाजी शमसुद्दीन इलियासी के अधीन रहा। इसलिए समस्तीपुर का नाम भी कभी हाजी शमसुद्दीन इलियासी के नाम पर ही हाजी शमसुद्दीनपुर हुआ करत् था।

शायद हिन्दू और मुसलमान शासकों के बीच बंटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र  समरसतापूर्ण है। समस्तीपुर समाजवाद के जनक कहे जाने वाले गुदरी के लाल बिहार के मुख्यमंत्री भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर का भी जन्म स्थान है। समस्तीपुर की सांसद का यह बयान जो समस्तीपुर को लेकर बोल रहीं है काफी अफसोसजनक होने के साथ-साथ काफी हास्यास्पद भी है।

समस्तीपुर का तो इन्हें एहसानमंद होना चाहिए था कि, जिसे कोई जानता तक नही था, उसे भी इस समस्तीपुर ने पहचान व सम्मान दिया। समस्तीपुर जननायक की धरती है। भारत में जितने भी सियासी दल है किसी भी दल के नेता जब समस्तीपुर आते है तो, जननायक की धरती कह कर संबोधन करते हैं।

आजादी के बाद भारत सरकार में लंबे समय तक प्रिंस ऑफ पार्लियामेंट सत्यनारायण सिंह केंद्र में मंत्री रहे। बाद में गवर्नर भी बने बलिराम भगत भी गवर्नर रहे। लोकगीतों की मशहूर गायिका प्रोफेसर श्रीमति शारदा सिन्हा समस्तीपुर की हैं, जिन्हें पुरी दुनियां जानती है। रेडियो पर चौपाल प्रसारण में मुखिया की अदाकारी  करने वाले समस्तीपुर जिला के ही थे।

रामायण और महाभारत के बाद टीवी पर बहुचर्चित धारावाहिक चंद्रकांता के लेखक देवकी नंदन खत्री भी समस्तीपुर जिला के ही थे। सुलभ शौचालय के संस्थापक बिन्देशवर पाठक भी इसी जिला के थे। रामविलास पासवान के मामू प्रखर समाजवादी नेता पूर्व विधायक एवं सांसद जननायक के परमभक्त रामसेवक हजारी भी इसी जिला के थे। एसे अनेकों महान हस्ती हैं जो बहुचर्चित हैं। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पुसा भी समस्तीपुर में ही है।

स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई से लेकर अभी तक बड़ी बड़ी घटनाओं की वजह से यह जिला या देश ही नही, विदेशों में भी काफी चर्चित रहा है, लेकिन पता नहीं पिता और पुत्री को क्या हो गया है ? पिता कविता लिख रहा है तो पुत्री समस्तीपुर की हीनताई कर रहीं हैं।

उन्होंने बताया कि ज़िले के चंद चाटुकारों ने अपने स्वार्थ के लिए एक नाबालिग सोच रखने वाली महिला को पैसे के बल पर और अशोक चौधरी से मोटी रकम लेकर उसे संसद भवन पहुंचाने में मदद की, इसमे सबसे ज्यादा चाटुकार सत्ता के दलाल कुछ मुस्लिम समुदाय के नेता भी शामिल रहे हैं।

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