???? बिग ब्रेकिंग: शरद पूर्णिमा कल! शरद पूर्णिमा के दिन क्या करें और क्या ना करें- आचार्य डॉ बाल्मिकी प्रसाद

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अरविन्द कुमार/अमित कुमार:(समस्तीपुर) हिंदू धर्म में हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा रही है, क्योंकि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपने संपूर्ण रूप में होता है तथा पुरी तरह चमकता है।

हिन्दु धर्म की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से व्रती व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस संबंध में देश के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ बाल्मिकी प्रसाद का बताना है कि, शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सौभाग्य और समृद्धि आती है, तथा इस दिन रात को खीर बनाकर चांदनी रात में खीर खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है, साथ ही इस दिन मंदिर में भगवान के दर्शन करने से साधक का मन शांत होता है। इस दौरान उन्होेंने यह भी बताया कि, अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 16 अक्टूबर की रात्रि 08 बजकर 40 मिनट पर होगा तथा 17 अक्टूबर की सायं 04 बजकर 55 मिनट पर शरद पूर्णिमा समाप्त होगी। इसलिए शरद पूर्णिमा का यह पर्व 16 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। इस दौरान चन्द्रोदय का समय सायं 05 बजकर 05 मिनट रहेगा।

शरद पूर्णिमा के दिन क्या करें ?

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को जल चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें। देवी लक्ष्मी की पूजा करें और धन के लिए प्रार्थना करें। घर में दीपक जलाएं, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आएगी। देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। धार्मिक ग्रंथ पढ़ें। जरूरतमंदों को दान करें।

शरद पूर्णिमा के दिन क्या नहीं करें

नकारात्मक विचारों को अपने मन में न आने दें। किसी से विवाद न करें। क्रोध न करें। इस दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए।

इन बातों पर विशेष ध्यान दें

शरद पूर्णिमा के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन न करें। साथ ही इस दिन लहसुन और प्याज का सेवन भी वर्जित है। इस दिन काले रंग का प्रयोग न करें और काले कपड़े ना पहने। चमकीले सफेद कपड़े पहनें तो बेहतर रहेगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर खाने का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की रोशनी में खीर का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की किरणों के प्रभाव से खीर का अमृत रस घुल जाता है। खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के बर्तन में ही रखें। अन्य धातुओं का प्रयोग न करें। शरद पूर्णिमा के दिन घर में किसी भी तरह का झगड़ा या कलह नहीं होना चाहिए। इससे घर में दरिद्रता आती है।

उपरोक्त सभी विचार देश के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ बाल्मिकी प्रसाद से की गयी बातचीत के आधार पर प्रस्तुत की गयी है। इस लेख में BIHAR KI AWAZ न्यूज पोर्टल के किसी भी सदस्य की लेखनी का अंश शामिल नही है।

संपादक- BIHAR KI AWAZ

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