उजियारपुर के सबसे छोटे कद के दिव्यांग निजि शिक्षक से मिलने पहुंचे युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी, दिव्यांग शिक्षक का बढ़ाया हौसला

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समस्तीपुर/उजियारपुर! अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो आपके रास्ते में कितना भी बड़ा पत्थर क्यों ना पड़ा हुआ हो, चाहे कितना ही बड़ा कोई भी कठिनाई क्यों ना आपका रास्ता रोकना चाहे, आप रूक नही सकते। कुछ ऐसी ही कहानी है उजियारपुर प्रखंड के चैता गांव निवासी, दिव्यांग अर्जून दास की।

जिन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर अपने ग्राम्य क्षेत्र में एक नयी ईबारत लिख दी है। उजियारपुर प्रखंड के अंगारघाट थाना क्षेत्र के चैता गांव निवासी, दिव्यांग अर्जुन दास ने अपने प्रतिभा के आगे कभी अपने छोटे कद को आड़े नही आने दिया। दिव्यांग अर्जुन दास आज भी अपने गाँव के सैकड़ों बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन देकर, उनके अंदर ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं।

दिव्यांग अर्जुन दास की लंबाई मात्र 2 फीट है। इसके बाबजुद वह अपने समाज के सभी बच्चों को शिक्षित बनाने का जिम्मा लिए हुए हैं। इधर इसकी सुचना जैसे ही जिले के चर्चित युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी को हुई, वह तत्काल दिव्यांग अर्जुन दास से मिलने उनके आवास सह शिक्षण संस्थान पर पहुंच गए। जहां युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी दिव्यांग शिक्षक अर्जुन दास को सम्मानित किया, तथा उनके द्वारा समाज में शिक्षा की अलख जगाने पर उन्हें धन्यवाद दिया।

इस दौरान समाजसेवी भाई राजू साहनी ने, दिव्यांग शिक्षक अर्जुन दास के यहां ट्यूशन लेने वाले दर्जनों छोटे छोटे बच्चों के बीच 06 कॉपी, कलम व पेंसिल से बने सेट को प्रति बच्चा वितरण भी किया। इस दौरान श्री साहनी ने बताया कि, जहां एक तरफ बच्चे के दिव्यांग होने पर उनके माता पिता अपना सिर पकड़कर बैठ जाते हैं, कुछ दिव्यांग भाई अपनी जीवन को निराशा से भर लेते हैं, कुछ गलत निर्णय लेने की सोचने लगते हैं!

उन सभी दिव्यांग भाईयों और बहनों तथा बच्चे के दिव्यांग होने पर सिर पकड़कर बैठने वाले माता पिता के लिए अर्जून दास आज प्रेरणाश्रोत बनकर सामने आए हैं। इन्होंने आज दुनियां को बता दिया कि, दिव्यांग होना कोई अभिशाप नही है। आज अर्जुन दास जी दिव्यांग होने के बावजूद ग्रेजुएशन तक की शिक्षा-दीक्षा पुरी करने के बाद आज अपने गांव के बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।

उनकी यह सोच उन्हें आज उनके संस्थान तक आने के लिए मजबुर कर दिया है। जिसके बाद उन्होंने आज अर्जुन दास जी के शिक्षण संस्थान में ट्यूशन लेने वाले छात्रों के बीच उनसे जो भी संभव हो पाया है उपलब्ध कराए हैं, और आने वाले दिनों में भी वह इनकी हरसंभव मदद करेंगे। वहीं इस संबंध में दिव्यांग शिक्षक अर्जुन दास का बताना है कि, वह काफी गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। जिस समय वह विद्यालय जाना शुरू किए थे तो, उस समय कुछ लोगों ने उनका मजाक भी बनाना शुरू किया था।

बाबजूद उन्होंने हिम्मत नही हारी, और अपना पढ़ाई जारी रखा तथा ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पुरी की। ग्रेजुएशन पुरी करने के बाद वह घर पर ही रहने लगे, तथा आसपास के बच्चों को मुफ्त ट्यूशन देने लगे। धीरे-धीरे उनके यहां पढ़ाई करने वाले बच्चों की भीड़ बढ़ने लगी। जिसके कारण कभी कभी दो शिफ्ट में बच्चों को पढ़ाना पड़ता था।

जीवन यापन से संबंधित एक सवाल के जबाव में दिव्यांग शिक्षक अर्जुन दास ने बताया कि, जब उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था तो, वह पैसे लेते भी नही थे किसी से, और कोई देता भी नही था, लेकिन विगत कुछ माह से कुछ बच्चे अपनी ईच्छा से 25/50 रूपए जो भी लेकर आते हैं, उसी से गुजारा हो जाता है।

हालांकि आज उजियारपुर प्रखंड के भगवानपुर कमला गांव निवासी, जिले के चर्चित युवा समाजसेवी भाई राजू साहनी उनसे मिलने आए हैं, तथा उनके यहां पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों के बीच उन्होंने कॉपी कलम व पेंसिल का भी वितरण किया है। इस दौरान भाई राजू साहनी ने उनकी भी हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया है। मौके पर सरपंच पति जयराम साहनी, भगत सहनी, श्रीराम साहनी, सुजीत कुमार, वरूण राय, सियाराम राम राय सहित दर्जनों की संख्या में स्थानीय लोग व दर्जनों बच्चे मौजूद रहे।

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